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सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को निर्देश- विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण की रिपोर्ट 6 हफ्ते में करें दायर

विजय माल्या. (फाइल फोटो)
विजय माल्या. (फाइल फोटो)

Vijay Mallya Case: न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि 31 अगस्त के आदेश में विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला दिया कि माल्या द्वारा कुछ कानूनी कार्यवाही ब्रिटेन में लंबित है

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 2, 2020, 3:50 PM IST
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने केंद्र से कहा कि वह ब्रिटेन (Britain) में भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या (Fugitive Businessman Vijay Mallya) को भारत को प्रत्यर्पित किए जाने सबंधी कार्यवाही पर छह सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट दायर करे. न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के बाद मामले की सुनवाई यूनाइटेड किंगडम में उनके खिलाफ "गुप्त कार्यवाही" के कारण नहीं हो रही थी. 31 अगस्त को पुनर्विचार याचिका खारिज होने और सजा की पुष्टि होने के बाद माल्या अपने खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाले थे.

न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि 31 अगस्त के आदेश में विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला दिया कि माल्या द्वारा कुछ कानूनी कार्यवाही ब्रिटेन में लंबित है. इस पर माल्या के वकील से जवाब मांगा गया है. ईसी अग्रवाल द्वारा एक आईए दायर की गयी है, माल्या के वकील इस मामले से मुक्त होना चाहते हैं. जस्टिस ललित ने आगे कहा कि उनकी अर्जी खारिज कर दी गई है और अग्रवाल आरोपी के वकील बने रहेंगे. इसके बाद न्यायमूर्ति ललित ने मामले से संबंधित रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 6 हफ्ते का समय दिया. अब इस मामले की सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते में होगी.

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SC ने खारिज की थी माल्या की कंपनी की याचिका
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या की कंपनी यूनाइटेड ब्रुअरीज होल्डिंग्स लिमिटेड (यूएचबीएल) की एक याचिका 26 अक्टूबर को खारिज कर दी थी. याचिका में कंपनी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के किंगफिशर एयरलाइंस का बकाया वसूलने के लिए यूएचबीएल को बंद करने के आदेश को चुनौती दी थी.

न्यायमूर्ति यूयू ललित, विनीत सरण और एस. रविंद्र भट की पीठ ने उच्च न्यायालय के छह मार्च के आदेश को चुनौती देने वाली यूएचबीएल की याचिका पर विचार करने से ही मना कर दिया. कर्नाटक उच्च न्यायालय की खंड पीठ ने मार्च में एकल न्यायाधीश की अदालत के सात फरवरी 2017 को पारित आदेश को बरकरार रखा था.

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भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने न्यायालय को अवगत कराया कि लगभग 3,600 करोड़ रुपये का बकाया वसूला जा चुका है लेकिन यूएचबीएल और माल्या पर अब भी 11,000 करोड़ रुपये बकाया हैं. उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कंपनी की परिसंपत्तियां कुर्क नहीं करना चाहिए क्योंकि ये परिसंपत्तियां बैंक के पास गिरवी हैं और इन पर दावे का पहला अधिकार बैंक का है.

उल्लेखनीय है कि माल्या विभिन्न बैंकों का कर्ज जानबूझकर नहीं चुकाने के मामले में वांछित हैं. वर्तमान में वह लंदन की जेल में बंद हैं और वहां भारत प्रत्यर्पित किए जाने के मामले का सामना कर रहे हैं.
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