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भीमा कोरेगांव केस में SC ने खारिज की NIA की याचिका, जारी रहेगी सुधा भारद्वाज की जमानत

भीमा कोरेगांव केस में SC ने खारिज की NIA की याचिका, जारी रहेगी सुधा भारद्वाज की जमानत

भीमा कोरेगांव केस में SC ने खारिज की NIA की याचिका.

भीमा कोरेगांव केस में SC ने खारिज की NIA की याचिका.

Bhima Koregaon Case: बॉम्‍बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के एक दिसंबर के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court का रुख किया था. सुधा भारद्वाज (Sudha Bharadwaj) को अगस्त 2018 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के प्रावधानों के तहत एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार किया गया था. उच्च न्यायालय ने एक दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार को अपदस्थ करने के षड्यंत्र में हिस्सा रही भारद्वाज जमानत की हकदार हैं और जमानत देने से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उनके मूल अधिकारों का हनन है.

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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में वकील-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज (Sudha Bharadwaj) को जमानत (Bail) देने के बॉम्‍बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के आदेश को चुनौती देने वाली, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील को मंगलवार को खारिज कर दिया. न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने एनआईए द्वारा दी गई दलीलों पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा, ‘हमें उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता है.’

    उच्च न्यायालय के एक दिसंबर के आदेश के खिलाफ एनआईए ने शीर्ष अदालत का रुख किया था. भारद्वाज को अगस्त 2018 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के प्रावधानों के तहत एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार किया गया था. उच्च न्यायालय ने एक दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि केंद्र सरकार को अपदस्थ करने के षड्यंत्र में हिस्सा रही भारद्वाज जमानत की हकदार हैं और जमानत देने से इनकार करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के उनके मूल अधिकारों का हनन है.

    उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि भायखला महिला जेल में बंद भारद्वाज को आठ दिसंबर को मुंबई की विशेष एनआईए अदालत में पेश किया जाए और उनकी जमानत की शर्तों एवं रिहाई की तारीख पर निर्णय लिया जाए. भारद्वाज इस मामले में गिरफ्तार 16 कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों में पहली आरोपी हैं जिन्हें तकनीकी खामी की वजह से जमानत दी गई है. कवि और कार्यकर्ता वरवर राव इस समय चिकित्सा के आधार पर जमानत पर हैं. पादरी स्टेन स्वामी की इस साल पांच जुलाई को अस्पताल में उस समय मौत हो गई थी, जब वह चिकित्सा के आधार पर जमानत का इंतजार कर रहे थे. अन्य आरोपी विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में बंद हैं. उच्च न्यायालय ने आठ आरोपियों- सुधीर धावले, वरवर राव, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा की तकनीकी खामी के आधार पर जमानत देने की याचिकाएं खारिज कर दी थीं.

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    क्‍या है मामला?
    यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद के कार्यक्रम में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण देने से जुड़ा है. पुलिस का दावा है कि भड़काऊ बयानों के कारण इसके अगले दिन पुणे के बाहरी इलाके कोरेगांव-भीमा में हिंसा भड़की. पुलिस का यह भी दावा है कि इस कार्यक्रम को माओवादियों का समर्थन हासिल था. बाद में इस मामले की जांच एनआईए को सौंप दी गई थी.

    Tags: Bhima Koregaon case, Bombay high court, National Investigation Agency, Supreme Court, Supreme court of india

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