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शादी के लिए धर्मांतरण सही नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के फैसले को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा,
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता."

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सितंबर में एक जोड़े की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि सिर्फ शादी के लिए धर्मांतरण करना (Religious Conversion) सही नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 17, 2020, 12:29 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को शादी के लिए धर्मांतरण के मसले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. याचिका में हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन कराना सही नहीं है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे (CJI SA Bobde) की अगुवाई वाली पीठ ने कहा, "हमें इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता."

याचिका में कहा गया था कि अगर कोर्ट एक व्यक्ति को अपनी मर्जी के मुताबिक धर्म चुनने की आजादी नहीं देता है, तो ये उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा, जोकि संविधान के तहत उसे प्राप्त हैं. इसके साथ ही याचिका में उस जोड़े (जिसकी याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी) के लिए तत्काल पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने खातिर दिशा निर्देशों की मांग की गई थी.

हाईकोर्ट के फैसले को एडवोकेट अलदानिश राइन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में एक जोड़े को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की याचिका खारिज कर दी थी. इस जोड़े में महिला मुस्लिम थी और एक हिंदू मर्द से शादी करने के लिए उसने हिंदू धर्म अपना लिया था. महिला ने कोर्ट से पुलिस सुरक्षा और अपने पिता द्वारा उनकी शादी में कोई बाधा नहीं डालने के लिए दिशा निर्देश देने की मांग की थी.

हाईकोर्ट ने 23 सितंबर को याचिका खारिज करते हुए कहा था कि सिर्फ शादी के धर्मांतरण करना सही नहीं है.
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