जस्टिस चंद्रचूड़ बोले-जज होने के अलावा नागरिक भी है, लोग हमें फोन करके ऑक्सीजन के लिए रो रहे हैं

केंद्र ने ये भी कहा की विदेश से 50,000 मैट्रिक टन ऑक्सीजन इंपोर्ट करने के लिए टेंडर जारी किया गया है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा की केंद्र सरकार को और ताकत लगानी होगी. ये केंद्र की जिम्मेदारी है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा की केंद्र से सहयोग करे. अपने सब से उच्च व्यक्ति को बताए की ये राजनीति का वक्त नही है.

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नई दिल्ली. देश भर में करोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court on Oxygen Crisis) ने चिंता जताई है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है की ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए जरूरी कदम जल्द उठाए जाएं. वहीं, केंद्र सरकार का कहना है की ऑक्सीजन के उत्पादन में कोई कमी नहीं है. दिक्कत ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर है. सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच आरोप प्रत्यारोप भी हुए. लेकिन कोर्ट दोनो सरकारों को राजनीति से अलग हो कर काम करने की हिदायत दी.

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में करोना की स्थिति और केंद्र और राज्य सरकारों की तैयारी को लेकर बहस हुई. कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकारों से जवाब मांगा था. आज सुनवाई के शुरू में ही जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने ऑक्सीजन की कमी, अस्पतालों की बदहाली और दवाओं की बढ़ती कीमतों को लेकर भावुक कर देने वाली बातें कही.

जज होने के अलावा एक आम नागरिक भी हैं...
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा की हम जज होने के अलावा एक नागरिक भी है. हम भी लोगों के रोने की आवाज सुन रहे है. लोग ऑक्सीजन मांग रहे है. अपने मां बाप भाई बहन के लिए. दिल्ली गुजरात महाराष्ट्र में ऑक्सीजन नही है. इसलिए आप (केंद्र सरकार) बताइए कि आज और आने वाले दिनों में क्या फर्क होगा. आप क्या करने वाले है.

इसके जवाब में केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा की कोई भी देश इस बात के लिए तैयार नहीं था की इतने मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत होगी. केंद्र सरकार सिर्फ ऑक्सीजन बना सकता है, लेकिन उसको ले जाना राज्य सरकार का काम है और राज्य ले भी रहे हैं. लेकिन कई राज्य नहीं ले जा रहे है, लॉजिस्टिक प्रोब्लम है. जब हमें ज्यादा टैंकर मिलेंगे तो हालात बेहतर होंगे. हम ने एक मॉनिटिरिंग सेल और कंट्रोल रूम बनाया है, अधिकारी काम कर रहे है 24 घंटे, राज्य को कंट्रोल रूम मदद कर रहे है.

दिल्ली में क्यों है ऑक्सीजन की कमी
तुषार मेहता ने ये स्वीकार किया की राज्यों में समन्वय की कमी है. उन्होंने कहा की कभी ये हो रहा है की अगर दिल्ली के लिए ऑक्सीजन का टैंकर आ रहा है तो उसको हरियाणा के अधिकारी रोक दे रहे है. ऐसा इसलिए हो रहा है की हर जगह अचानक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ जा रही है.
तुषार मेहता को रोकते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा की क्या आप ये कह रहे है की दिल्ली में ऑक्सीजन इसलिए कम है क्योंकि दिल्ली सरकार ले नहीं पा रही है.

दिल्ली सरकार नहीं ले रही है ऑक्सीजन
तुषार मेहता ने जवाब दिया की हमारे पास सप्लायर का लेटर है. दिल्ली सरकार नहीं ले जा रही है. इसकी वजह ये है की टैंकर नही है. टैंकर का इंतजाम करने की कोशिश हो रही है. तुषार मेहता ने कहा की ऑक्सीजन की कमी नही है. दिक्कत ट्रांसपोर्ट का है. देश में रोजाना 10,000 मैट्रिक टन ऑक्सीजन का प्रोडक्शन है. 28 अप्रैल को 8600 मैट्रिक टन का प्रोडक्शन हुआ. जरूरत 8400 मैट्रिक टन की थी. राज्य ले गए सिर्फ 7330 मैट्रिक टन.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा की जो लोग मर चुके है हम उनको वापस नही ला सकते. लेकिन जो अभी ज़िंदा है उनको बचाना है. अगर दिल्ली ने आप से 700 मैट्रिक टन ऑक्सीजन मांगा तो आप ने सिर्फ 400 मैट्रिक टन क्यों दिया. दिल्ली को पूरा राज्य स्टेटस भी नही है. हम इस इश्यू में नहीं जाना चाहते. लेकिन अफसोस हो रहा है.

मेहता ने कहा की हम कोशिश कर रहे है. सोमवार को हम बेहतर बता पाएंगे. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा की लेकिन तब तक 500 लोग और मर जायेंगे. हम इस पर चर्चा नही करना चाहते की दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन उठाया या नहीं. दिल्ली में पूरे देश के लोग रहते है. केंद्र सरकार का खास रोल है. और ये हमने दिल्ली में केंद्र के अधिकार वाले जजमेंट में लिखा है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने आगे कहा की केंद्र सरकार को और ताकत लगानी होगी. ये केंद्र की जिम्मेदारी है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा की केंद्र से सहयोग करे. अपने सब से उच्च व्यक्ति को बताए की ये राजनीति का वक्त नही है. चीफ सेक्रेटरी बात करे सॉलिसिटर जनरल से और जो भी कमी है उसको पूरा करें. केंद्र सरकार की तरफ से बताया गया की ऑक्सीजन की कोई कमी नही है. इंडस्ट्री को सप्लाई बंद है. पैनिक की कोई जरूरत नही है. देश में 50 हजार मैट्रिक टन का रिजर्व है.

दिल्ली ने कभी नहीं की एक्स्ट्रा ऑक्सीजन की मांग
केंद्र सरकार ने कहा की दिल्ली ने हमसे कभी एक्स्ट्रा ऑक्सीजन की मांग नहीं की. जितना उन्होंने मांगा उससे ज्यादा दिया गया है. शुरू में 390 मैट्रिक टन मांगा तो 490 दिया गया. इसके अलावा कोई मांग नहीं आई. 700 कभी नही मांगा. केंद्र ने ये भी कहा की विदेश से 50,000 मैट्रिक टन ऑक्सीजन इंपोर्ट करने के लिए टेंडर जारी किया गया है.

ऑक्सीजन की कमी को लेकर दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने कहा की पिछले चार दिनों में केंद्र सरकार से अच्छी बात हो रही है. एक दिन हमारी जरूरत 400 मैट्रिक टन हो गाई थी. उस वक्त दिक्कत हुई थी. दिल्ली में आने वाले दिनों में हमारे पास 15000 ऑक्सीजन बेड और 12000 आई सी यू बेड होंगे. हमारी ऑक्सीजन की जरूरत 976 मैट्रिक टन होगी.

हम बिलकुल राजनीति नहीं कर रहे. और केंद्र सरकार से मदद मांग रहे है. आज सुप्रीम कोर्ट ने कोई लिखित आदेश तो नहीं दिया लेकिन केंद्र सरकार से कहा है की राज्यों में ऑक्सीजन की कमी को जल्द दूर किया जाए. अगली सुनवाई 10 मई को होगी.

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