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उमर अब्दुल्ला की हिरासत पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, 2 मार्च को अगली सुनवाई

News18Hindi
Updated: February 14, 2020, 3:13 PM IST
उमर अब्दुल्ला की हिरासत पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, 2 मार्च को अगली सुनवाई
उमर अब्दुल्ला 5 अगस्त 2019 से नजरबंद हैं.

उमर अब्दुल्ला 5 अगस्त, 2019 से सीआरपीसी की धारा 107 के तहत हिरासत में थे. इस कानून के तहत, उमर अब्दुल्ला की छह महीने की एहतियातन हिरासत अवधि गुरुवार यानी 5 फरवरी 2020 को खत्म होने वाली थी. लेकिन फिर उन्हें PSA के तहत हिरासत में ले लिया गया.

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  • Last Updated: February 14, 2020, 3:13 PM IST
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नई दिल्ली. उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया है. उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला पायलट ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और उन्हें कोर्ट में पेश कर रिहा करने की मांग की थी. इसपर कोर्ट ने नोटिस जारी कर जम्मू-कश्मीर प्रशासन से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी.






सारा ने कही याचिका में ये बातें
सारा अब्दुल्ला ने अपनी याचिका में सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर सुरक्षा अधिनियम 1978 के खिलाफ अपील की है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अब्दुल्ला को हिरासत में रखना 'स्पष्ट रूप से गैरकानूनी' है. नजरबंदी के आदेश में बताई गई बातें पर्याप्त नहीं जो इस तरह के आदेश के लिए जरूरी है. सारा ने इसके साथ ही 5 फरवरी के सरकारी पीएसए आदेश को निरस्त करने की भी दरख्वास्त की है. इसके साथ ही, सारा ने सरकार पर लोगों के जीवन का अधिकार छीनने का आरोप लगाया है.

फारूख अब्दुल्ला के साथ भी किया ऐसा व्यवहार 
पायलट ने कहा कि प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए नजरबंद किया ताकि संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के खिलाफ विरोध को दबाया जा सके. शांति व्यवस्था बहाल रखने को लेकर उनसे किसी खतरे का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि इस शक्ति का इस्तेमाल करने का उद्देश्य न केवल उमर अब्दुल्ला को कैद में रखने के लिए, बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूरे नेतृत्व को और साथ ही अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेतृत्व को कैद में रखने का है. इसी तरह का व्यवहार फारूक अब्दुल्ला के साथ किया गया है जिन्होंने वर्षों तक राज्य और केंद्र की सेवा की... जब भी जरूरत पड़ी, भारत के साथ खड़े हुए.

दरअसल, उमर अब्दुल्ला (49) और महबूबा मुफ्ती (60) को पिछले साल पांच अगस्त से एहतियातन हिरासत में रखा गया है, जब केंद्र ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने और इस पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों- लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर- में बांटने की घोषणा की थी.

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First published: February 14, 2020, 2:24 PM IST
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