अग्रिम जमानत की याचिका पर 45 दिन बाद हुई सुनवाई, जज ने सुनाया फैसला तब जेल में था शख्स

  (फाइल फोटो)
(फाइल फोटो)

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के शख्स की अग्रिम जमानत याचिका 45 दिनों से अधिक समय तक अटकी रही. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि तब तक व्यक्ति जेल में डाला जा चुका था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2020, 1:25 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक मामले की देरी से लिस्टिंग की कीमत एक शख्स को अपनी आजादी गंवा कर चुकानी पड़ी. तमिलनाडु (Tamil Nadu) निवासी शख्स की अग्रिम जमानत की याचिका 45 दिनों से अधिक समय तक अटकी रही. जब अदालत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए तब वह पहले से ही जेल में था.

जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष शुक्रवार को जब अदालत ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका का मामला पेश हुआ तब 'देर से न्याय मिलना अन्याय' की धारणा का उदाहरण दिखा. मामले की सुनवाई शुरू करते ही जस्टिस खानविलकर ने कहा-  'यह क्या है? सिर्फ इसलिए कि वह अपनी पत्नी के साथ समझौता नहीं कर सके, उन्हें गिरफ्तार किया जाना चाहिए!'

वकील ने बताई सच्चाई
याचिकाकर्ता के लिए वकील की दलील की जरूरत के बिना, पीठ इस बात को लेकर आश्वस्त थी कि शख्स की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए, अदालत ने तब आदेश पारित किया. अदालत ने शख्स की पत्नी और मनाप्पराई पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया. इसने यह आदेश भी जारी किया कि उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और उसे अग्रिम जमानत दी जानी चाहिए. इस पर शख्स की ओर से अदालत में मौजूद वकील बी करुणाकरण ने कहा कि उनके मुवक्किल को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है.
करुणाकरण ने कहा, 'माय लॉर्डशिप, मैंने यह याचिका 27 अगस्त को दायर की थी, जो आज सुनवाई के लिए आया है. मेरा मुवक्किल पहले से ही जेल में हैं. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कृपया रजिस्ट्री को कुछ निर्देश जारी करें कि अग्रिम जमानत याचिकाओं को शीघ्र सुनवाई के लिए लिस्टेड किया जाए.'



जज को यह कहते सुना गया...
उन्होंने कहा कि इस मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत याचिका दाखिल करने का उद्देश्य खत्म हो गया है और अदालत भविष्य के याचिकाकर्ताओं के लिए स्थिति को और बेहतर बना सकती है. पीठ ने कहा, 'ओह, वह पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं  फिर इस याचिका में कुछ भी नहीं बचा. यह याचिका अब किसी काम की नहीं है.' तब जस्टिस खानविल्कर ने अग्रिम जमानत देने का आदेश हटाया और उन्होंने ट्रायल कोर्ट के समक्ष नियमित जमानत की अर्जी सहित अन्य उचित उपायों का इस्तेमाल करने के लिए कहा.



कार्यवाही समाप्त होने के बाद जज द्वारा अपने अदालती कर्मचारियों को यह कहते हुए भी सुना गया कि 'रजिस्ट्रार, ज्यूडिशियल और लिस्टिंग को ऐसे मामलों को लिस्टिंग करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश होना चाहिए.'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज