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2021 जनवरी से नहीं मिली है सेना की महिला अफसरों को सैलरी, SC ने लगाई सरकार को फटकार

17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद थलसेना (Army) में महिलाओं को बराबरी का हक मिलने का रास्ता साफ हो गया था.

17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद थलसेना (Army) में महिलाओं को बराबरी का हक मिलने का रास्ता साफ हो गया था.

Supreme court Latest news in Hindi: सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 14 साल से कम और उससे ज्यादा सेवाएं दे चुकीं महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन का मौका दिया जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 4, 2021, 10:54 AM IST
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एहतेशाम खान

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल फरवरी में आदेश दिया था कि पुरुषों की तरह महिला अफसरों को भी सेना में परमानेंट कमीशन दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद सेना ने ऐसी 615 महिला अफसरों में से सिर्फ 277 को ही परमानेंट कमीशन दिया है. बाकी को या तो रिजेक्ट किया गया है या फिर उनका मामला लंबित है.

परमानेंट कमीशन न देने की मुख्य वजह है मेडिकल में अनफिट होना. महिला अफसरों का कहना है कि उन्हें गलत तरीके से अनफिट बताया गया है. इसलिए कुछ अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस याचिका पर बुधवार को कोर्ट में सुनवाई हुई. महिला अफसरों की वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया की कुछ महिलाएं जिनका मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है उनको जनवरी के महीने से सैलरी नहीं दी गई है.



गलत पैमाना अपना कर किया गया रिजेक्ट
ये सुन कर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने मौखिक तौर पर सरकारी वकील से कहा कि सभी अफसरों की सैलरी को शुक्रवार तक रिलीज किया जाए. हालांकि इस बाबत कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है. आज हुई सुनवाई में महिला अफसरों के वकील परमजीत सिंह पटवालिया ने बताया कि गलत पैमाना अपना कर महिला अफसरों को रिजेक्ट किया गया है.

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महिला अफसरों ने लड़ी थी 17 साल लड़ाई
17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद थलसेना (Army) में महिलाओं को बराबरी का हक मिलने का रास्ता साफ हो गया था. सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में एक अहम फैसले में कहा कि उन सभी महिला अफसरों को तीन महीने के अंदर सेना में स्थायी कमीशन दिया जाए, जो इस विकल्प को चुनना चाहती हैं. अदालत ने केंद्र की उस दलील को निराशाजनक बताया था, जिसमें महिलाओं को कमांड पोस्ट न देने के पीछे शारीरिक क्षमताओं और सामाजिक मानदंडों का हवाला दिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत 14 साल से कम और उससे ज्यादा सेवाएं दे चुकीं महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन का मौका दिया जाए. महिलाओं को कॉम्बैट रोल देने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और सेना पर छोड़ा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'जंग में सीधे शामिल होने वाली जिम्मेदारियां (कॉम्बैट रोल) में महिलाओं की तैनाती नीतिगत मामला है. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी यही कहा था. इसलिए सरकार को इस बारे में सोचना होगा.'
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