'दुर्भाग्य से प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की', शाहीन बाग प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की तल्‍ख टिप्‍पणियां

शाहीन बाग में सीएए विरोध में हुए प्रदर्शन की फाइल फोटो
शाहीन बाग में सीएए विरोध में हुए प्रदर्शन की फाइल फोटो

Supreme Court Verdict on Shaheen Bagh Protest : सुप्रीम कोर्ट की ये बेहद नाराज़गी भरी टिप्‍पणियां न केवल प्रदर्शन के नाम पर रोड बंद किए जाने को लेकर थीं, बल्कि इस मसले पर प्रशासन के रवैये पर भी थीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 3:48 PM IST
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नई दिल्‍ली. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में शाहीन बाग (Shaheen Bagh) में 100 दिनों से ज्यादा दिन तक चले धरना-प्रदर्शन और रोड ब्‍लॉक से लोगों को हुई परेशानी पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को अपने फैसले में कई तल्‍ख टिप्‍पणियां कीं. सुप्रीम कोर्ट की ये बेहद नाराज़गी भरी टिप्‍पणियां न केवल प्रदर्शन के नाम पर रोड बंद किए जाने को लेकर थीं, बल्कि इस मसले पर प्रशासन के रवैये पर भी थीं.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्‍पष्‍ट कहा कि कोई भी व्यक्ति या समूह द्वारा सार्वजिनक स्थानों पर अनिश्चितकाल के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता. साथ ही कोर्ट ने इस पूरे मामले पर प्रशासनिक कार्रवाई और उसके रवैये पर गहरा असंतोष जताया.

आइये पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्‍पणियां...



-"सोशल मीडिया चैनल अक्सर खतरे से भरे होते हैं" और वे अत्यधिक ध्रुवीकरण वाले वातावरण की ओर ले जाते हैं.
-शाहीन बाग में ऐसा ही हुआ, जहां विरोध के रूप में शुरुआत हुई और इससे यात्रियों को असुविधा हुई.

-धरना प्रदर्शन या पब्लिक मीटिंग निर्धारित जगहों पर ही होने चाहिए.

-धरना-प्रदर्शन के नाम पर सार्वजनिक स्थानों पर अनिश्चितकाल तक कब्जा नहीं किया जा सकता है.

-विरोध-प्रदर्शन के नाम पर दूसरे लोगों को परेशानी नहीं पहुंचाई जा सकती.

-लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखने के लिए किस तरीके से प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए, यह उनकी जिम्मेदारी है.

-प्रशासनिक कार्यों को करने के लिए अदालत के आदेशों के पीछे नहीं छिपना चाहिए.

-दुर्भाग्य से प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई और इस तरह हमें हस्तक्षेप करना पड़ा.



जस्टिस संजय किशन कौल, अनिरुद्ध बोस और जस्टिस कृष्‍ण मुरारी की तीन सदस्‍यीय बेंच ने यह फैसला याचिकाकर्ता वकील एवं सामाजिक कार्यकर्ता अमित साहनी द्वारा दायर याचिका पर सुनाया. साहनी द्वारा दरअसल, दिल्‍ली (Delhi) के शाहीन बाग (Shaheen Bagh) इलाके में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शन और रोड ब्‍लॉक किए जाने के बाबत दायर की गई थीं. साहनी ने अर्जी में कहा था कि सड़कों पर ऐसे विरोध जारी नहीं रह सकते. सड़कों को ब्लॉक करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद प्रदर्शन 100 दिनों तक चलते रहे और सुप्रीम कोर्ट को दिशानिर्देश तय करने चाहिए.
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