मथुरा के जवाहरबाग कांड की जांच के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई

मथुरा के जवाहरबाग कांड की जांच के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई
इस घटना में मुकुल द्विवेदी और यूपी पुलिस के एक अन्य अधिकारी संतोष यादव सहित कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी. (PTI)

Mathura Jawaharbagh Case CBI Investigation: याचिका में कहा गया है कि मुख्य अभियुक्त रामवृक्ष यादव के मारे जाने को लेकर भी सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. मुमकिन है कि उसे किसी सुरक्षित जगह पहुंचा दिया गया हो, जहां वो अब भी सुरक्षित हो. याचिका में गुहार लगाई गई है कि सीबीआई को आदेश दिया जाए कि समुचित संख्या में अधिकारियों की टीम बनाकर इस संवेदनशील मामले की जांच पूरी कर दो महीने में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 26, 2020, 1:10 PM IST
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नई दिल्ली. कानपुर के बहुचर्चित विकास दुबे एनकाउंटर केस (Vikas Dubey Encounter) के बाद अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) चार साल पहले मथुरा के जवाहरबाग कांड की जांच की याचिका पर सुनवाई करेगा. जवाहर बाग में शासन की शह पर कब्जा जमाए बैठे असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई के लिए पहुंचे पुलिस बल पर हुए हिंसक हमले में एसपी मुकुल द्विवेदी सहित 30 लोगों की हत्या कर दी गई थी. मुकुल द्विवेदी की पत्नी ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस पूरी साजिश की दो स्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई थी. अब गुरुवार को इस याचिका पर सुनवाई होगी.

याचिका में अपील की गई है कि सीबीआई ने अबतक मुख्य अभियुक्त रामवृक्ष यादव और उसके साथियों के खिलाफ पिछले 40 महीनों से ज़्यादा समय से जारी जांच के दौरान 82 से ज़्यादा खुफिया रिपोर्टों का हवाला तो दिया है, लेकिन कार्रवाई नहीं की है. ऐसे में ये पता लगाया जाना जरूरी है कि शासन की जमीन पर आखिर ये कब्ज़ा कैसे चल रहा था. साथ ही इतने हथियारों का जखीरा और पूरी साजिश रचने वाले और अंजाम देने वालों में कौन कौन शामिल रहे हैं.

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याचिका में कहा गया है कि मुख्य अभियुक्त रामवृक्ष यादव के मारे जाने को लेकर भी सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. मुमकिन है कि उसे किसी सुरक्षित जगह पहुंचा दिया गया हो, जहां वो अब भी सुरक्षित हो. याचिका में गुहार लगाई गई है कि सीबीआई को आदेश दिया जाए कि समुचित संख्या में अधिकारियों की टीम बनाकर इस संवेदनशील मामले की जांच पूरी कर दो महीने में रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे.
क्या है पूरा मामला?
वर्ष 2014 में एक संप्रदाय विशेष के अनुयायी राम वृक्ष यादव ने अपने समर्थकों के साथ मथुरा के जवाहर बाग पार्क पर कब्जा कर लिया था. स्थानीय निवासियों ने इसका विरोध किया, लेकिन कथित तौर पर एक नेता के करीबी होने के कारण पुलिस उस पर हाथ नहीं डाल रही थी. इसके बाद कोर्ट ने इस पार्क को खाली कराने का आदेश दिया था. कोर्ट के आदेश पर 2 जून 2016 को पार्क खाली कराने पहुंची पुलिस पर रामवृक्ष यादव और उसके समर्थकों ने घातक हथियारों से हमला बोल दिया था.

इसके बाद दोनों तरफ से हुई गोलीबारी में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी.  यह घटना वाद संख्या 242/2016 के रूप में थाना सदर बाजार, जिला मथुरा में दर्ज की गई. प्राथमिकी में आईपीसी की धाराओं 147, 148, 149, 302, 307, 332, 333, 336, 436, 186 और 188 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया.।

सीबीआई ने पूरी नहीं की जांच
जवाहरबाग हत्याकांड में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी वीरगति को प्राप्त हो गए थे. इस घटना में मुकुल द्विवेदी और यूपी पुलिस के एक अन्य अधिकारी संतोष यादव सहित कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई थी. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो मार्च 2017 को इस घटना की सीबीआई जांच कर दो महीने में रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था, लेकिन इस घटना के चार साल बीत जाने के बाद भी आज तक सीबीआई ने इस घटना की जांच पूरी नहीं की है.

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इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नौ मई 2017, 13 अक्टूबर 2017, 13 जुलाई 2018 को इस मामले की जांच आगे बढ़ाने का आदेश दिया, लेकिन इसके बाद भी मामले में कोई प्रगति नहीं हुई. (PTI इनपुट के साथ)
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