SC ने अभी नहीं दी 5 लोगों के साथ मुहर्रम जुलूस निकालने की इजाजत, 28 राज्यों को पक्षकार बनाने के निर्देश

SC ने अभी नहीं दी 5 लोगों के साथ मुहर्रम जुलूस निकालने की इजाजत, 28 राज्यों को पक्षकार बनाने के निर्देश
मुहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना होता है. इस महीने की 10वीं तारीख को यह पर्व मनाया जाता है. (PTI)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने याचिकाकर्ता को कहा कि मुहर्रम जुलूस (Muharram) पूरे देश में जगह-जगह निकलेगा, इसलिए हर राज्य सरकार की मंज़ूरी या उनका पक्ष सुनना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि वो अपनी याचिका में 28 राज्य की सरकारों को भी वादी बनाएं, जिसके बाद सुनवाई होगी.

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  • Last Updated: August 26, 2020, 7:30 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फिलहाल 5 लोगों के साथ मुहर्रम (Muharram) का जुलूस निकालने की परमिशन नहीं दी है. शीर्ष अदालत ने सोमवार को मुहर्रम का सार्वजनिक जुलूस निकालने के लिए अनुमति लेने की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें महामारी की स्थिति के मद्देनज़र सिर्फ 5 लोगों के साथ मुहर्रम का सार्वजनिक जुलूस निकालने पर प्रकाश डाला गया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि मुहर्रम जुलूस पूरे देश में जगह-जगह निकलेगा, इसलिए हर राज्य सरकार की मंज़ूरी या उनका पक्ष सुनना जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि वो अपनी याचिका में 28 राज्य की सरकारों को भी वादी बनाएं, जिसके बाद सुनवाई होगी.

मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यन की बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील वासी हैदर से कहा कि वह अपनी याचिका में 28 राज्यों को पार्टी बनाएं और केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग करें. जिसमें जुलूस को केवल एक सीमित क्षमता में होने दिया जाए. यानी केवल 5 लोग जुलूस में शामिल रहें.

बेंच ने कहा, 'जैसा कि प्रार्थना की गई, याचिकाकर्ता को याचिका में 28 राज्यों को उत्तरदाता पक्षकार के रूप में पेश करने की अनुमति है. लेकिन COVID 19 हर साल नहीं आता. लिहाजा सभी पक्षों को सुनना जरूरी है.'




याचिकाकर्ता के वकील वासी हैदर ने कहा कि मुहर्रम के लिए आंध्र प्रदेश राज्य द्वारा COVID-19 महामारी को देखते हुए इसके अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव, मो इलियास रिज़वी ने दिशा-निर्देश जारी किया है. जिसमें कहा गया कि मुहर्रम (शहादत) के अंतिम दिनों (9वें और 10 वें दिन) को केवल मुजावर, मुथावली या प्रबंध समितियों द्वारा बिना किसी सार्वजनिक जुलूस निकाला जाना चाहिए. हैदर ने कहा कि इसमें केवल 4 दिन ही शेष हैं और इसके लिए अदालत की अनुमति अनिवार्य है.
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सीजेआई बोबडे ने हालांकि किसी भी आदेश को पारित करने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि 28 राज्यों और संघ को याचिका में निहित नहीं किया गया है. वह कोई भी आदेश को पारित करने से पहले उन्हें पहले सुनना चाहेंगे. सीजेआई ने यह भी कहा कि अभी हाल ही में, उन्होंने लोगों को दादर, बायकला और चेंबूर के मंदिरों में एक सीमित क्षमता में प्रार्थना समारोह में प्रार्थना करने की अनुमति दी थी, लेकिन ऐसा इसलिए भी था क्योंकि महाराष्ट्र और संघ राज्य पीठ के समक्ष थे.

बता दें कि मुहर्रम इस्लामिक वर्ष का पहला महीना होता है. इस महीने की 10वीं तारीख को यह पर्व मनाया जाता है. इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन की शहादत के गम में मुहर्रम का त्योहार मनाया जाता है.

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मुहर्रम के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग हुसैन की शहादत में गमजदा होकर उन्हें याद करते हैं. शोक के प्रतीक के रूप में इस दिन ताजिये के साथ जूलूस निकालने की परंपरा है. ताजिये का जुलूस इमाम बारगाह से निकलता है और कर्बला में जाकर खत्म होता है.
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