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सामुदायिक रसोई संबंधी याचिका पर हलफनामा दाखिल नहीं करने पर 5 लाख रुपये जुर्माना

भाषा
Updated: February 10, 2020, 2:39 PM IST
सामुदायिक रसोई संबंधी याचिका पर हलफनामा दाखिल नहीं करने पर 5 लाख रुपये जुर्माना
सामुदायिक रसोई संबंधी याचिका पर बोला सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि अगले 24 घंटे में हलफनामा दायर करने वाले राज्यों को एक लाख रुपये जमा करने होंगे जबकि इतने समय में भी हलफनामा दायर नहीं करने वालों को पांच लाख रुपये देने होंगे.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने देशभर में सामुदायिक रसोइयां (community kitchens) बनाए जाने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर हलफनामा दायर नहीं करने को लेकर कई राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को सोमवार को लताड़ लगाई. न्यायमूर्ति एन वी रमना की अगुआई वाली पीठ ने कहा कि अगले 24 घंटे में हलफनामा दायर करने वाले राज्यों को एक लाख रुपये जमा करने होंगे जबकि इतने समय में भी हलफनामा दायर नहीं करने वालों को पांच लाख रुपये देने होंगे.

पांच राज्यों-पंजाब, नगालैंड, कर्नाटक, उत्तराखंड तथा झारखंड और दो केंद्रशासित प्रदेशों - अंडमान निकोबार एवं जम्मू-कश्मीर ने जनहित याचिका पर अपना जवाब दायर किया है.

कोर्ट ने सामुदायिक रसोई बनाने का 18 अक्टूबर को समर्थन किया था और कहा था कि देश को भुखमरी की समस्या से निपटने के लिए इस प्रकार की प्रणाली की आवश्यकता है. उसने सामुदायिक रसोइयां बनाने के प्रस्ताव पर केंद्र एवं अन्य राज्यों के जवाब मांगने के लिए उन्हें नोटिस जारी किया है.

क्या था याचिका मेंयाचिका में आरोप लगाया गया था कि भूख और कुपोषण की वजह से पांच साल से कम उम्र के कई बच्चे मर जाते हैं और यह स्थिति भोजन के अधिकार और नागरिकों के जीवन के अधिकार समेत विभिन्न मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. सामाजिक कार्यकर्ता अनूप धवन, इशान सिंह और कुंजन सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में केंद्र को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के दायरे से बाहर लोगों के लिए राष्ट्रीय खाद्य ग्रिड बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है.

किसने दाखिल की थी याचिका
याचिका में भूख से होने वाली मौतों को कम करने के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएलएसए) को एक योजना तैयार करने का आदेश देने की मांग की गई थी. याचिका में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, झारखंड और दिल्ली में सरकार के वित्तपोषण से चलाई जा रही सामुदायिक रसोई का उल्लेख किया गया है. इसमें लोगों को स्वास्थ्यकर स्थिति में रियायती दरों पर खाना दिया जाता है. यह याचिका अधिवक्ता आशिमा मांडला और फुजैल अहमद अयूबी के जरिए दाखिल की गई है.

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First published: February 10, 2020, 1:29 PM IST
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