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आधार का डेटा इस्तेमाल करने की इजाज़त के लिए कानून संशोधन पर SC ने केंद्र से मांगा जवाब

News18Hindi
Updated: November 22, 2019, 5:47 PM IST
आधार का डेटा इस्तेमाल करने की इजाज़त के लिए कानून संशोधन पर SC ने केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने आधार कानून में संशोधन के लिए केंद्र सरकार को नोटिस दिया है.

आधार के डेटा (Aadhaar Data) को लेकर जुलाई में सरकार (Government) ने कुछ संशोधन किए थे. अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले पर केंद्र सरकार को नोटिस दिया है.

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  • Last Updated: November 22, 2019, 5:47 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को आधार एक्ट (Aadhar Act) में किए गए संशोधनों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. बता दें कि बीते दिनों केंद्र सरकार ने आधार कानून में संशोधन कर इस बात की इजाजत दी थी कि निजी कंपनियां उपभोक्ताओं द्वारा प्रमाणीकरण के लिये स्वेच्छा से उपलब्ध कराए गए आधार डेटा का इस्तेमाल कर सकती हैं.

SC ने सरकार को जवाब देने का आदेश दिया
CJI एसए बोबडे और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने आधार संशोधन कानून, 2019 की वैधानिकता को चुनौती देने वाली एस जी वोम्बटकेरे की याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र को इस मामले में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया. न्यायालय ने इस जनहित याचिका को इस मामले में पहले से ही लंबित याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि आधार कानून में 2019 के संशोधन शीर्ष अदालत के पहले के आदेशों का उल्लंघन हैं.

पीठ ने जताई थी आपत्ति

इससे पहले पांच न्यायाधीशों की पीठ ने आधार कानून की वैधता बरकरार रखते हुए कुछ आपत्तियां जताई थीं और कहा था कि निजी कंपनियों को ग्राहकों की अनुमति से भी उनकी जानकारी के प्रमाणीकरण के लिए आधार डेटा के इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती. बाद में, केंद्र ने कानून में संशोधन करते हुए बैंक खाता खोलने और मोबाइल फोन कनेक्शन हासिल करने के लिए उपभोक्ताओं को पहचान पत्र के रूप में स्वेच्छा से आधार का प्रयोग करने की अनुमति देते हुए कानून में संशोधन किया था.

जुलाई में संशोधन विधेयक हुआ था पारित
राज्य सभा ने जुलाई महीने में ध्वनि मत से आधार और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किया था. यद्यपि, विपक्ष द्वारा डेटा चोरी होने की आशंका सहित कई कारणों का उल्लेख करते हुये विधेयक का विरोध किया था. लोक सभा ने इस विधेयक को चार जुलाई को पारित किया था. इस संशोधित विधेयक में आधार डेटा के प्रावधानों का निजी कंपनियों द्वारा उल्लंघन करने पर एक करोड़ रूपए का जुर्माना और जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है.
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संशोधित कानून में टेलीग्राफ कानून, 1885 और धन शोधन कानून, 2002 के तहत स्वैच्छिक आधार पर केवाईसी के प्रमाणीकरण के लिये आधार संख्या के उपयोग का प्रावधान किया गया है. इसमें बच्चों को 18 साल की उम्र होने पर बायोमेट्रिक आईडी कार्यक्रम से निकलने का विकल्प भी प्रदान किया गया है.

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First published: November 22, 2019, 5:47 PM IST
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