लाइव टीवी

रोहित वेमुला-पायल तड़वी की मां की याचिका पर SC ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब

Sushil Pandey | News18Hindi
Updated: September 20, 2019, 5:39 PM IST
रोहित वेमुला-पायल तड़वी की मां की याचिका पर SC ने केंद्र सरकार से मांगा जवाब
रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मां ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कॉलेजों और शैक्षणिक संस्‍थानों में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है.

रोहित वेमुला (rohit vemula) और पायल तड़वी (payal tadvis) की मां ने सुप्रीम कोर्ट (supreme court) में याचिका दायर करके कॉलेजों और शैक्षणिक संस्‍थानों में जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2019, 5:39 PM IST
  • Share this:
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शुक्रवार को रोहित वेमुला (Rohit Vemula) और पायल तड़वी (Payal Tadvis) की मां की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार (Central Government), यूजीसी (UGC) और एनएबीएच (NABH) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. रोहित और पायल की मां ने कॉलेजों और शैक्षणिक संस्‍थानों पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया है. उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके शैक्षिक और अन्‍य संस्‍थानों में जातिगत भेदभाव खत्‍म करने का सशक्‍त और कारगर मैकेनिज्‍म बनाने की गुहार लगाई है.

याचिका में की गई है ये मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की गई है कि कोर्ट यूजीसी को इस बावत निर्देश जारी करे, ताकि उच्च शैक्षिक संस्थानों के नियमन 2012 को सख्ती से लागू किया जा सके. याचिका में ये भी मांग की गई है कि विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शैक्षिक संस्थानों में छात्रों-शिक्षकों को समान अवसर मुहैया कराने के लिए विशेष सेल बनाए जाएं. याचिका में कहा गया है कि इससे अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों शिक्षकों या कर्मचारियों के साथ भेदभाव की आंतरिक शिकायतों से समय पर निपटारे में मदद मिलेगी. याचिका में मांग की गई है कि शिक्षण संस्थाओं में एससी/एसटी छात्र-छात्राओं के लिए कोचिंग, ट्यूशन और ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जाए.

इस याचिका में कहा गया है कि देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाद कायम है. अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्राओं के खिलाफ जो घटनाएं हुई हैं वे मौजूदा मानदंडों और नियमों का पालन नहीं किए जाने को दर्शाती हैं.

इस याचिका में कहा गया है कि ये घटनाएं संविधान की धारा 14, 15, 16, 17 और 21 के तहत प्रदत्त समता, समानता, भेदभाव के खिलाफ अधिकार, छुआछूत का अंत और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करती हैं.

ये भी पढ़ें: लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 20, 2019, 5:39 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...