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मानहानि केस में कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को सुप्रीम कोर्ट ने दिया नोटिस

कुणाल कामरा की फाइल फोटो
कुणाल कामरा की फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के लिए कथित अपमानजनक ट्वीट करने के मामले में हास्य कलाकार कुणाल कामरा (Kunal Kamra) और रचिता तनेजा (Rachita Taneja) के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने के लिए दायर याचिकाओं पर शुक्रवार को फैसला किया और दोनों को नोटिस दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2020, 11:59 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आपत्तिजनक ट्वीट के कारण आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए दायर याचिका पर शुक्रवार को कॉमेडियन कुणाल कामरा (Kunal Kamra) और कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा (Rachita Taneja) को नोटिस जारी किया है. अदालत ने दोनों को कथित रूप से न्यायपालिका और न्यायाधीशों को बदनाम करने के लिए उनके खिलाफ अदालती कार्यवाही की अवमानना करने वाली याचिका के जवाब में यह नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने उनसे छह सप्ताह में अपना जवाब देने को कहा है.

शीर्ष अदालत ने कहा कि कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को अदालत में पेश होने की जरूरत नहीं है. जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने कानून के छात्र आदित्य कश्यप और  श्रीरंग कटनेश्वर्कर द्वारा दायर याचिका पर रचिता तनेजा और कुणाल कामरा को नोटिस जारी किया है.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने सुनवाई के दौरान कहा, 'तनेजा द्वारा किए गए ट्वीट का उद्देश्य केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय को बदनाम करना और उसकी निंदा करना करना था. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उनके खिलाफ अदालत अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की सहमति दी थी, यह देखने के बाद कि उनके हास्य चित्र ने 'न्यायपालिका में जनता के विश्वास को डिगा कर रख दिया.'



कामरा के खिलाफ दायर याचिका में क्या है?
कामरा के खिलाफ दायर याचिकाओं में एक याचिका विधि के छात्र श्रीरंग कटनेश्वर्कर ने दायर की है और उन्होंने दावा किया कि 11 नवंबर को कामरा ने ये ट्वीट तब करने शुरू किए जब वर्ष 2018 में आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने अग्रिम जमानत याचिका बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा खारिज करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी और शीर्ष अदालत में सुनवाई चल रही थी. याचिका में आरोप लगाया गया कि 11 नवंबर को अर्नब गोस्वामी को शीर्ष अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद कामरा ने फिर कई ट्वीट किए जो उच्चतम न्यायालय के लिए अपमानजनक थे और उन्होंने शीर्ष अदालत की गरिमा को और कम किया.

याचिका में दावा किया गया, ‘कथित अवमानना करने वाले (कामरा) का ट्विटर पर 17 लाख लोग अनुसरण करते हैं और कथित अवमानना करने वाले ट्वीट को उनका अनुसरण करने वालों ने देखा और कई ने उन्हें रीट्वीट किया.’ इसमें आरोप लगाया गया कि जब कुछ लोगों ने कामरा को अदालत की अवमानना को लेकर आगाह किया तो उन्होंने, ‘‘अशिष्ट, आक्रमक और बिना पश्चाताप’’ वाला व्यवहार किया और दिखाया कि शीर्ष अदालत के लिए उनमें ‘ सम्मान’ नहीं है.

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कामरा के ट्वीट इतने ‘खराब भावना’ लिए हुए थे कि साधारण व्यक्ति भी समझ सकता है कि वे शीर्ष अदालत के लिए अपमानजनक हैं. उन्होंने कहा, ‘भारतीय नागरिकों में विधि द्वारा स्थापित अदालत के प्रति शीर्ष सम्मान है. देश में कानून का अनुपालन करने वाला कोई भी व्यक्ति इस तरह के ट्वीट को बर्दाश्त नहीं कर सकता जिस तरह का ट्वीट कथित अवमानना करने वाले (कामरा) ने किया.’

रचिता तनेजा के खिलाफ याचिका में क्या कहा गया है?
कानून के छात्र आदित्य कश्यप ने अधिवक्ता नामित सक्सेना के आध्यम से दायर याचिका में कहा है कि तनेजा द्वारा तस्वीरों के साथ पोस्ट किये गये तीन ट्वीट के आधार पर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही याचिका दायर करने के लिए पांच दिसंबर को उन्हें अटार्नी जनरल से लिखित सहमति मिल गयी थी. ये ट्वीट कथित रूप से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों और उनके फैसलों के प्रति घृणित, अपमानजनक और जानबूझ कर आक्षेप लगाने वाले थे.

याचिका में कहा गया कि तनेजा की ये पोस्ट वायरल हुईं और न्यायपालिका की संस्था पर हमला करने वालों ने इसे खूब साझा किया. याचिका के अनुसार तनेजा सोशल मीडिया को प्रभावी करने वाली हैं और उनके विभिन्न मंचों पर हजारों फालोअर्स हैं. याचिका में तनेजा को सोशल मीडिया पर ऐसी अपमानजनक पोस्ट प्रकाशित करने से रोका जाए जो शीर्ष अदालत को बदनाम करते हों और उसकी सत्ता को कम करते हों.
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