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जजों की नियुक्ति की सूचना की जानकारी देने के पक्ष में जस्टिस चंद्रचूड़

भाषा
Updated: November 14, 2019, 2:15 AM IST
जजों की नियुक्ति की सूचना की जानकारी देने के पक्ष में जस्टिस चंद्रचूड़
जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि मूल न्यायिक कामकाज को नुकसान पहुंचेगा.

जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस बात को रेखांकित किया कि जवाबदेही तय करने वाले सुधार लाने में विफल रहने से अदालतों की निष्पक्षता में भरोसा खत्म होगा और इससे मूल न्यायिक कामकाज को नुकसान पहुंचेगा.

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ (Dy Chandrachud) ने उच्चतर न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति संबंधी सूचना के खुलासे की पैरवी करते हुए बुधवार को कहा कि कॉलेजियम 'अपनी ही प्रसव पीड़ा का शिकार' है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि चिकित्सा सूचना, निजी संबंध, कर्मचारी रिकॉर्ड और जजों की पेशेवर आय को ‘निजी सूचना’ मानकर गोपनीय कहा जा सकता है और इसका खुलासा जनहित के आधार पर मामला-दर-मामला के आधार पर किया जाएगा.

भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया कार्यालय को सार्वजनिक प्राधिकार बताते हुए उसके सूचना के अधिकार के दायरे में आने का फैसला देने वाली पांच जजों की संविधान पीठ के सदस्य जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता जजों को सक्षम बनाती है कि वे बिना किसी डर के मामलों में फैसला कर सकें . 113 पन्नों के अलग लेकिन मिलते-जुलते फैसले में उन्होंने कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता और स्वतंत्र रूप से कानून लागू करने की जजों की क्षमता, कानून के शासन के लिए महत्वपूर्ण है.

'जनता की रुचि रहती है न्यायिक नियुक्तियों में किन नियमों का पालन किया गया'
जजों की नियुक्ति संबंधी सूचना के खुलासे की पैरवी करते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, 'महत्वपूर्ण मामलों में, कॉलेजियम अपनी ही प्रसव पीड़ा का शिकार है.' उन्होंने कहा कि इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि यह जानने में जनता की बहुत रुचि रहती है कि उच्चतर न्यायपालिका के लिए उम्मीदवारों के चयन और न्यायिक नियुक्तियों में किन नियमों का पालन किया गया है.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ' ज्ञान एक शक्तिशाली उपकरण है जो वह विश्वास पैदा करता है, जो न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया की शुचिता के लिए जरूरी है. यह जरूरी है क्योंकि कॉलेजियम व्यवस्था यह अभिधारणा बनाती है कि जजों की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव स्वयं जजों द्वारा आगे बढ़ाए जाते हैं .' उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्टों के जजों की संपत्ति संबंधी सूचना, जजों की 'निजी सूचना' नहीं कही जा सकती और इसलिए इसमें निजता के अधिकार का मामला नहीं है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ' न्यायपालिका की एकनिष्ठा, स्वतंत्रता और निष्पक्षता, न्याय तक प्रभावी और पक्षपात रहित पहुंच के लिए पूर्व शर्त है. और साथ ही अधिकारों के संरक्षण के लिए भी यह महत्वपूर्ण है. '

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First published: November 14, 2019, 2:13 AM IST
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