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विधायकों-सांसदों को अयोग्य घोषित किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह- स्पीकर नहीं ट्रिब्यूनल करे फैसला

एहतेशाम खान | News18Hindi
Updated: January 21, 2020, 2:19 PM IST
विधायकों-सांसदों को अयोग्य घोषित किए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की सलाह- स्पीकर नहीं ट्रिब्यूनल करे फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने संसद को सलाह दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्पीकर राजनीतिक दल का ही सदस्य होता है. वह महीनों-महीनों ऐसे मामले को अटकाए रखते हैं. ऐसे में उसका फैसला निष्पक्ष नहीं हो सकता है.

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  • Last Updated: January 21, 2020, 2:19 PM IST
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नई दिल्ली. किसी सांसद या विधायक की सदस्यता रद्द करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बेहद सख्त टिप्पणियां की है. कोर्ट ने इसके साथ ही कहा कि स्पीकर के पॉवर पर विचार करने की जरूरत है, क्योंकि स्पीकर निष्पक्ष नहीं हो सकता. सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में संसद को सलाह दिया कि इस पर विचार कर कानून बनाया जाए.

दरअसल मौजूदा कानून के मुताबिक किसी भी सांसद या विधायक की सदस्यता रद्द करने या उसे बहाल रखने का पूरा अधिकार स्पीकर के पास होता है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि स्पीकर किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होता है, इसलिए वह निष्पक्ष फैसले नहीं ले सकता. अदालत ने सुझाव दिया कि संसद किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाए, जिसके पास सदस्यता रद्द करने या बरकार रखने पर फैसला का अधिकार हो.

मणिपुर के मामले की सुनवाई कर रही थी सुप्रीम कोर्ट
आम तौर पर जब दल-बदल या सरकार को समर्थन देने या वापस लेने का मामला होता है तो उस सदस्य कि सदस्यता पर सवाल खड़े किए जाते हैं. ऐसे में स्पीकर को अधिकार होता है कि वह सदस्य कि सदस्यता रद्द करे, बरकरार रखे. वहीं कई बार स्पीकर ऐसे मामलों में कोई फैसला ही नहीं लेते. ऐसी स्थिति में मामला फिर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है. हालांकि अदालत स्पीकर को कोई फैसला लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संसद को इसका समाधान ढूंढना चाहिए.



मौजूदा मसला मणिपुर से जुड़ा है. दो विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रदेश में मंत्री श्याम कुमार की सदस्यता रद्द करने की मांग की. श्याम कुमार पहले कांग्रेस में थे और बाद में बीजेपी में शामिल हो कर मंत्री बन गए, लेकिन मणिपुर के स्पीकर इस पर कोई फैसला ही नहीं ले रहे. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के स्पीकर से चार हफ्तों में फैसला लेने को कहा है.



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First published: January 21, 2020, 11:27 AM IST
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