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सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाई लक्ष्मण रेखा, कहा- अदालतें नहीं बना सकती कानून

भाषा
Updated: August 10, 2018, 12:03 AM IST
सुप्रीम कोर्ट ने याद दिलाई लक्ष्मण रेखा, कहा- अदालतें नहीं बना सकती कानून
SC ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा, डांस बार को संचालन की अनुमति क्यों नहीं? (File Photo)

पीठ में शामिल जस्टिस नरीमन ने कहा, ‘‘मुझे भूल सुधार करने दें, एक लक्ष्मण रेखा है, हम एक हद तक कानून की व्याख्या करते हैं, हम कानून बनाते नहीं हैं हम कानून बना नहीं सकते हैं.”

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राजनीति का अपराधीकरण रोकने की बार-बार अपील करने और विधायिका पर इस संबंध में पर्याप्त प्रयास नहीं करने का आरोप लगाए जाने के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को वकीलों को कोर्ट के अधिकारक्षेत्र का दायरा याद दिलाते हुए कहा कि एक ‘‘लक्ष्मण रेखा’’ है.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर,  जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की संविधान पीठ ने गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे लोगों को चुनावी राजनीति से बाहर करने का अनुरोध करने वाली जनहित यचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राष्ट्र की तीन इकाइयों कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का हवाला दिया.

पीठ में शामिल जस्टिस नरीमन ने कहा, ‘‘मुझे भूल सुधार करने दें, एक लक्ष्मण रेखा है, हम एक हद तक कानून की व्याख्या करते हैं, हम कानून बनाते नहीं हैं हम कानून बना नहीं सकते हैं.”



एक एनजीओ की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने जब कहा कि 2014 में 34 प्रतिशत सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि के थे और यह लगभग असंभव प्रतीत होता है कि संसद राजनीति का अपराधीकरण को रोकने के लिए कोई कानून बनाएगी.



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First published: August 9, 2018, 11:21 PM IST
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