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Opinion: सुप्रीम कोर्ट के सबसे यादगार चीफ जस्टिस में शुमार रहेंगे रंजन गोगोई

News18Hindi
Updated: November 15, 2019, 7:27 PM IST
Opinion: सुप्रीम कोर्ट के सबसे यादगार चीफ जस्टिस में शुमार रहेंगे रंजन गोगोई
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.

रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने अयोध्या केस, चीफ जस्टिस के ऑफिस को आरटीआई (RTI) के दायरे में लाने, राफेल डील, सबरीमाला मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक फैसले किए, जिन्हें वर्षों तक याद रखा जाएगा.

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जनवरी 2018 में तीन अन्य वरिष्ठ जजों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करके न्यायिक सुधारों का बिगुल बजाने वाले न्यायमूर्ति रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने विनम्र प्रेस नोट के माध्यम से, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पद से विदाई ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इसके पहले 45 अन्य चीफ जस्टिस रहे हैं, परंतु गोगोई ने अपने फैसलों से देश और न्यायिक व्यवस्था पर अमिट छाप छोड़ी.

दृढ़ता, भाग्य और पुरुषार्थ का मेल
गोगोई के पिता असम के मुख्यमंत्री थे. तत्कालीन कानून मंत्री ने उनके पिता से पूछा कि रंजन गोगोई राजनीति में कब आएंगे? इस पर गोगोई के पिता ने जवाब दिया कि मेरा बेटा राजनीति में कभी नहीं आएगा और एक दिन वह भारत का चीफ जस्टिस बनेगा.

गोगोई के चीफ जस्टिस बनने के पीछे भाग्य का भी बड़ा खेल है. जब वो असम के डिब्रूगढ़ में पढ़ रहे थे, तब उनके पिता ने कहा कि दो भाइयों में से सिर्फ एक ही सैनिक स्कूल जा सकता है. इसका फैसला टॉस से हुआ, जिसमें उनके बड़े भाई जीते, जो सैनिक स्कूल में पढ़कर वायु सेना में एयर मार्शल पद से रिटायर हुए. रंजन गोगोई डिब्रूगढ़ और फिर दिल्ली में पढ़ाई पूरी करते हुए, पहले वकील फिर जज बने. गोगोई अपने विद्यार्थी और वकालत के जीवन में बहुत पुरुषार्थी भी थे. गुवाहाटी हाईकोर्ट में उनके मित्र और वकील सुरेंद्र शर्मा के अनुसार गोगोई शुरुआती दौर में साइकिल रिक्शा से हाईकोर्ट आते थे. जिसके बाद उन्होंने वेस्पा स्कूटर और फिर मारुति 800 खरीदी. एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे की यह सादगी आजकल के नेताओं और जजों के लिए एक मिसाल है.




रामलला न्यायिक मूर्ति और राममंदिर का निर्माण
अयोध्या मामला दो शताब्दी से प्रशासन और अदालतों के चक्कर काट रहा था. कभी दस्तावेज और कभी अनुवाद के नाम पर सुप्रीम कोर्ट में यह मामला, 10 वर्षों से लटका था. चीफ जस्टिस बनने के बाद गोगोई ने 5 जजों की बेंच का गठन किया. न्यायिक सुनवाई शुरू करने के पहले उन्होंने सभी पक्षों को मध्यस्थता के माध्यम से समस्या का समाधान करने का मौका दिया.
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जिसके बाद उन्होंने दृढ़ता से 40 दिन में मामले की सुनवाई ख़त्म करके 15 दिन में राम मंदिर के पक्ष में सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला दे दिया. दिल्ली के एक समारोह में व्याख्यान देते हुए गोगोई ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि खुशहाली बढ़ने पर मुकदमेबाजी कम की जा सकती है. अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश में शांति और खुशहाली बढ़ने की उम्मीद है.

सफल टीम लीडर और कुशल नेतृत्व
अयोध्या फैसले में सभी जजों की सर्वसम्मति से न्यायमूर्ति गोगोई की टीम लीडरशिप और प्रशासनिक कुशलता भी देखने को मिली. राष्ट्रपति कोविंद की अपील के बाद गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हिंदी और अन्य देशी भाषाओं में अनुवाद और प्रकाशन करवाने की राष्ट्रीय पहल की. उसी परंपरा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रकाशित 'कोर्ट्स ऑफ इंडिया : पास्ट टू प्रेजेंट" पुस्तक के असमिया संस्करण का विमोचन गुवाहाटी में हुआ. इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के भावी चीफ जस्टिस बोबडे ने कहा, ‘गोगोई के साथ काम करने का अवसर मिलने को वो सौभाग्य मानते हैं.’

बोबडे के अनुसार गोगोई का धैर्य, साहस और चरित्र इतना मजबूत है कि कुछ भी गलत होना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट के जज अरुण मिश्रा ने कहा, ‘मुख्य न्यायमूर्ति गोगोई ने देश के समक्ष मौजूद सर्वाधिक महत्वपूर्ण अनिर्णय पर निर्णय लिया है.’ सुप्रीम कोर्ट के अन्य जज रवींद्र भट्ट ने चीफ जस्टिस गोगोई की तारीफ करते हुए कहा, "अयोध्या मामले में हम सभी ने इतिहास बनते देखा और यह फैसला भारतीय इतिहास में अमिट रहेगा.’

निर्भीक और साहसी जज
जस्टिस गोगोई अनुशासनप्रिय और नो नॉनसेंस जज माने के बावजूद व्यक्तिगत स्तर पर स्नेहिल और मिलनसार हैं. इसके बावजूद गोगोई ने अपने ही पूर्व सहयोगी और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू के खिलाफ अवमानना का मामला चलाने में कोई संकोच नहीं किया. मद्रास हाईकोर्ट के तत्कालीन जज सी एस कर्णन के खिलाफ भी कार्रवाई करने वाली बेंच में गोगोई भी शामिल थे. न्यायमूर्ति गोगोई ने तीन साल पहले 'कौन बनेगा करोड़पति' शो के महानायक अमिताभ बच्चन के खिलाफ फैसला देते हुए इनकम टैक्स विभाग के आदेश को बहाल कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट में इसके पहले 45 अन्य चीफ जस्टिस रहे हैं, परंतु गोगोई ने अपने फैसलों से देश और न्यायिक व्यवस्था पर अमिट छाप छोड़ी.


न्यायिक सुधारों के पुरोधा
न्यायमूर्ति गोगोई ने न्यायिक व्यवस्था को सुधारने के लिए हर स्तर पर ठोस प्रयास किए. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में अनेक प्रशासनिक सुधार करने के साथ उन्होंने कॉलेजियम व्यवस्था को और पारदर्शी बनाया. उनके प्रयासों से सुप्रीम कोर्ट में कुल जजों की संख्या बढ़कर 35 हो गई. उनके कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट में 14 और अनेक हाईकोर्ट में 124 से ज्यादा जजों की नियुक्ति हुई. निचली अदालतों में जजों की वैकेंसी को भरने के लिए गोगोई ने अनेक प्रशासनिक और न्यायिक आदेश जारी किए. सरकार और प्रशासन को और अधिक जवाबदेह बनाने के लिए गोगोई ने लोकपाल और लोकायुक्त की नियुक्ति पर विशेष जोर दिया.

राष्ट्रीय सुरक्षा के पैरोकार
आसाम के लोग अवैध घुसपैठ के दर्द से कई दशकों से परेशान हैं, जो अब पूरे भारत का मर्ज बनता जा रहा है. इस मसले के दीर्घकालिक समाधान के लिए गोगोई ने एनआरसी की व्यवस्था को लागू करने के लिए ठोस आदेश पारित किए. सर्वोच्च अदालत के आदेश के अनुसार एनआरसी की व्यवस्था को लागू कराने वाले आईएएस अधिकारी हजेला को सुरक्षा की दृष्टि से तीन साल के लिए गृह राज्य मध्य प्रदेश भेजकर चीफ जस्टिस गोगोई ने असाधारण मानवीयता का परिचय दिया.

न्यायमूर्ति बोबडे को देश की सर्वोच्च न्यायपालिका की मशाल सौंपने के बाद न्यायमूर्ति गोगोई न्यायिक व्यवस्था से भले ही रिटायर हो गए हों, लेकिन अपने ऐतिहासिक फैसलों की वजह से वो पूरे देश में हमेशा याद रखे जाएंगे.

(सुप्रीम कोर्ट के वकील और विख्यात स्तंभकार हैं, उनका ट्विटर हैंडल -- @viraggupta है)

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First published: November 15, 2019, 4:31 PM IST
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