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सुप्रीम कोर्ट ने कोयंबटूर रेप-मर्डर के दोषी की फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा - तुम्‍हारे अपराध ने समाज को हिला दिया

News18Hindi
Updated: November 7, 2019, 2:18 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने कोयंबटूर रेप-मर्डर के दोषी की फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा - तुम्‍हारे अपराध ने समाज को हिला दिया
दोषी मनोहरन को 20 सितंबर को फांसी दी जानी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई हुई थी.

शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने तमिलनाडु (Tamil Nadu) के कोयंबटूर (Coimbatore) में 2010 में एक 10 साल की बच्‍ची के रेप (Rape) और उसकी व उसके भाई की हत्‍या (Murder) के दोषी मनोहरन (Manoharan) की पुनर्विचार याचिका (Review Petition) खारिज कर दी. मनोहरन को 20 सितंबर को फांसी होनी थी, लेकिन अब तक सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर रोक लगाई हुई थी.

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  • Last Updated: November 7, 2019, 2:18 PM IST
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उत्‍कर्ष आनंद

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोयंबटूर रेप और मर्डर केस (Rape and Murder Case) के दोषी मनोहरन की पुनर्विचार याचिका (Review Petition) खारिज करते हुए फांसी की सजा (Capital Punishment) बरकरार रखी है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तुम्‍हारे अपराध ने समाज की आत्‍मा (Conscience of Society) को हिलाकर रख दिया है. बता दें कि मामले में दोषी मनोहरन (Manoharan) ने अपने एक साथी के साथ मिलकर 10 साल की बच्‍ची और उसके छोटे भाई का स्‍कूल जाते समय मंदिर के पास अपहरण किया. इसके बाद उन्‍हें कोयंबटूर जिले के अंदरूनी इलाके (Remote Area) में ले जाकर बच्‍ची के साथ रेप किया. फिर बच्‍ची और उसके सात साल के भाई की हत्‍या कर दी.

दूध में जहर मिलाकर पिलाया, फिर नहर में फेंक‍ दिया
मनोहरन ने दोनों बच्‍चों को दूध में जहर (Poision) मिलाकर पिलाया था. इसके बाद उसने दोनों को नजदीक की एक नहर (Canal) में फेंक दिया. मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस आरएफ नरीमन, सूर्यकांत और संजीव खन्ना ने फांसी बरकरार रखी, जबकि जस्टिस संजीव खन्ना ने इस फैसले से असहमति जताते हुए उम्रकैद दी. मनोहरन को 20 सितंबर को फांसी दी जानी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगाई हुई थी.

'मौत की सजा के फैसले की समीक्षा का नहीं है कोई आधार'
एक मंदिर के पुजारी मोहनकृष्णन ने मनोहरन का इस अपराध में साथ दिया था. वह एक पुलिस मुठभेड़ (Police Encounter) में मारा गया था. मनोहरन को ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा दी थी, जिसकी पुष्टि बाद में मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने की. मनोहरन ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर तीन जजों की बेंच (Bench) ने सुनवाई की. पीठ ने एक के मुकाबले दो के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषी मनोहरन की मौत की सजा को बरकरार रखने वाले फैसले की समीक्षा करने का कोई आधार नहीं है.

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First published: November 7, 2019, 2:18 PM IST
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