सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सबरीमला मामले में फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर नहीं कर रहे सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सबरीमला मामले में फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिकाओं पर नहीं कर रहे सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने कहा, ‘‘हम सबरीमला मामले (Sabarimala Case) में पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई नहीं कर रहे हैं. हम पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा भेजे गये मुद्दों पर विचार कर रहे हैं.’’

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह सबरीमला मंदिर (Sabrimala Mandir) में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने संबंधी 2018 के फैसले पर पुनर्विचार के लिये दायर याचिकाओं की सुनवाई नहीं कर रहा है. कोर्ट ने कहा कि इसकी बजाय वह ‘धार्मिक परंपराओं’ में न्यायालय के हस्तक्षेप के दायरे सहित दूसरे बड़े मुद्दों पर विचार करेगा.

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे (SA Bobde) की अध्यक्षता वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने शुरू में ही स्पष्ट कर दिया कि वह सबरीमला मंदिर मामले में पांच सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा भेजे गये मुद्दों पर ही विचार करेगा. पीठ ने इस मामले में अधिवक्ताओं से कहा कि वे 17 जनवरी को बैठक करके ‘मुद्दों को नये सिरे से तैयार करने’ या उसके द्वारा विचार करने योग्य अतिरिक्त मुद्दे जोड़ने के बारे में फैसला लें.

पीठ ने कहा, ‘‘हम सबरीमला मामले में पुनर्विचार याचिकाओं की सुनवाई नहीं कर रहे हैं. हम पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा भेजे गये मुद्दों पर विचार कर रहे हैं.’’



ये याचिकाएं हो सकती हैं सूचीबद्ध
पीठ ने हालांकि कहा कि वह इनका फैसला नहीं करेगी लेकिन वह मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, दाऊदी बोहरा मुस्लिम समुदाय में लड़कियों के खतने और गैर पारसी व्यक्ति से विवाह करने वाली पारसी महिलाओं का अज्ञारी में पवित्र अग्नि के समक्ष प्रवेश वर्जित करने संबंधित याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी.

इस संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव , न्यायमूर्ति एम एम शांतनागौडर, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्य कांत शामिल हैं.

पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत के सेक्रेटरी जनरल, सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी सहित चार वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ तालमेल करके उन मुद्दों को अंतिम रूप देंगे जिन पर न्यायालय को विचार करना होगा.



इन बातों पर भी किया जाएगा विचार
पीठ ने कहा कि इस बैठक में यह निर्णय भी करना चाहिए कि इस मामले में बहस के लिये प्रत्येक अधिवक्ता को कितना समय दिया जायेगा. इसी तरह, अधिवक्ताओं को यह भी विचार करना चाहिए किस मुद्दे पर कौन सा वकील बहस करेगा.

पीठ ने इस मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद के लिये सूचीबद्ध करते हुये अयोध्या प्रकरण में सुचारू ढंग से सुनवाई के लिये वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन और डा राजीव धवन की सराहना भी की.

पीठ ने कहा, ‘‘हम इसके लिये (मुद्दे तय करने के लिये) तीन सप्ताह का समय देते हैं और इसके बाद इसे सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करेंगे.’’

पीठ ने के परासरन, राजीव धवन, सिंघवी, इन्दिरा जयसिंह, वी गिरि, सी ए सुन्दरम की दलीलों को सुनने के बाद उनसे कहा कि वे विभिन्न धर्मो में महिलाओं के साथ भेदभाव और धार्मिक मसलों में न्यायिक हस्तक्षेप के दायरे सहित व्यापक मुद्दों को अंतिम रूप दें.

जयसिंह ने कहा कि सबरीमला के फैसले को गलत करार दिये बगैर यह मामला वृहद पीठ को नहीं सौंपा जा सकता है. उन्होंने नौ न्यायाधीशों की पीठ को मामला सौपे जाने पर आपत्ति करते हुये कहा कि शिरूर मठ मामले में सात न्यायाधीशों की पीठ के फैसले पर संदेह नहीं किया गया है.

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