कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों की पढ़ाई लिखाई में ना आए कोई रुकावट, राज्य जल्द अपलोड करें लिस्ट- सुप्रीम कोर्ट

  (पीटीआई फाइल फोटो)

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी राज्य बिना किसी देरी के ऐसे बच्चों की जानकारी NCPCR के पोर्टल पर अपलोड करें जो कोविड-19 के चलते अनाथ हो गए हैं.

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नई दिल्ली. कोरोनाकाल (Coronavirus In India) के दौरान अनाथ और बेसहारा हुए बच्चों के रख रखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का लिखित आदेश मंगलवार को जारी हो गया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी राज्य बिना किसी देरी के ऐसे बच्चों की जानकारी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर- NCPCR) के पोर्टल पर अपलोड करें. शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य ऐसे बच्चों की पहचान चाइल्डलाइन 1089, स्वास्थ्य अधिकारियों, पुलिस, NGO और पंचायती राज के जरिए करें. अदालत ने यह भी कहा कि गैर कानूनी तरीके से बच्चों को गोद लेने में शामिल NGO के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि ऐसे बच्चे जो सरकारी या प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे थे , उनकी पढ़ाई आगे भी सरकारी और प्राइवेट स्कूल में जारी रहे. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने डिस्ट्रिक चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को निर्देश दिया है कि ऐसे बच्चों को खाना, दवा, कपड़े, राशन का बंदोबस्त किया जाए. बच्चे जिन योजनाओं के हकदार हैं उसके तहत उनको वित्तीय सहायता पहुंचायी जाए.

अदालत ने कहा कि ऐसे बच्चे जिनके गार्जियन उनका सही से रख रखाव नहीं कर रहे हैं, उन्हें तुरंत CWC के सामने पेश किया जाए

कोविड-19 के कारण 30,000 से अधिक बच्चे अनाथ हुए
उधर NCPCR ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विभिन्न राज्यों से पांच जून तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोविड-19 महामारी के चलते कम से कम 30,071 बच्चे अनाथ हुए हैं. आयोग ने कहा कि महामारी के चलते इनमें से 26,176 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया और 3,621 बच्चे अनाथ हो गए जबकि 274 को उनके रिश्तेदारों ने भी त्याग दिया.

आयोग ने अदालत को यह भी बताया कि एक अप्रैल 2020 से पांच जून 2021 तक के ऐसे बच्चों के राज्यवार आंकड़े उसके बाल स्वराज पोर्टल पर दिए गए हैं जिनके माता-पिता में से किसी एक की मौत हो चुकी है या वे माता-पिता दोनों को ही खो चुके हैं. हालांकि, पोर्टल पर मौत के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है.

महाराष्ट्र में प्रभावित बच्चों की संख्या सर्वाधिक 7,084 रही, जिनमें से अधिकतर ने महामारी के चलते अपने माता-पिता या माता-पिता में से किसी एक को खो दिया. सुप्रीम कोर्ट द्वारा संज्ञान लिए गए इस मामले में आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि इसके अलावा अन्य राज्यों में भी बच्चे प्रभावित हुए, जिनमें उत्तर प्रदेश में 3,172, राजस्थान में 2,482, हरियाणा में 2,438, मध्य प्रदेश में 2,243, आंध्र प्रदेश में 2,089, केरल में 2,002, बिहार में 1,634 और ओडिशा में 1,073 बच्चे शमिल हैं.



प्रभावित होने वाले बच्चों में 15,620 लड़के, 14,447 लड़कियां

आयोग ने कहा कि प्रभावित होने वाले बच्चों में 15,620 लड़के, 14,447 लड़कियां और चार ट्रांसजेंडर शामिल हैं. इनमें से अधिकतर बच्चे आठ से 13 आयुवर्ग के हैं. आयोग ने एक बार फिर अदालत के समक्ष यह चिंता जाहिर की कि उसे पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई शिकायतें मिली हैं, जिसमें कई निजी संगठनों और लोगों द्वारा ऐसे बच्चों का आंकड़ा एकत्र किए जाने के आरोप लगाए गए हैं.


ऐसे संगठन और लोगों द्वारा प्रभावित बच्चों और परिवारों को मदद की पेशकश की गई है. आयोग ने कहा कि ऐसे लोग/संगठन गोद लेने संबंधी कानून का पालन किए बिना बच्चा गोद लेने के इच्छुक परिवारों को इन्हें सौंप रहे हैं.

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