जुर्माने के खिलाफ बिल्डर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, हरियाणा सरकार को जारी किया गया नोटिस

एनजीटी ने 30 अक्टूबर 2019 को सोनीपत इलाके में 6 बिल्डरों पर पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने के कारण 22.5 करोड रुपए का जुर्माना लगाया था.
एनजीटी ने 30 अक्टूबर 2019 को सोनीपत इलाके में 6 बिल्डरों पर पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने के कारण 22.5 करोड रुपए का जुर्माना लगाया था.

एनजीटी ने 30 अक्टूबर 2019 को सोनीपत इलाके में 6 बिल्डरों पर पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने के कारण 22.5 करोड रुपए का जुर्माना लगाया था. एनजीटी ने मामले की सुनवाई के दौरान यह कहा था कि उल्लंघन गंभीर है और इस दृष्टि से मुआवजा ऐसा होना चाहिए जिससे अन्य तमाम लोग सबक ले सकें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 10:14 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार (Government of Haryana) समेत अन्य लोगों को नोटिस जारी किया है. दरअसल टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने अपनी याचिका में सोनीपत इलाके में एनवायरमेंटल मानकों के उल्लंघन के लिए 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने वाले एनजीटी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीओ को नोटिस जारी किया है.

बता दें की एनजीटी ने 30 अक्टूबर 2019 को सोनीपत इलाके में 6 बिल्डरों पर पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने के कारण 22.5 करोड रुपए का जुर्माना लगाया था. एनजीटी ने मामले की सुनवाई के दौरान यह कहा था कि उल्लंघन गंभीर है और इस दृष्टि से मुआवजा ऐसा होना चाहिए जिससे अन्य तमाम लोग सबक ले सकें.

ढाई-ढाई करोड़ रुपए का जुर्माना
अपने आदेश में एनजीटी ने टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर 10 करोड़ और टीडीआई के सेक्टर 10 में माय फ्लोर प्रोजेक्ट, टस्कन सिटी एमडी बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, पार्क स्टेट डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड और नारंग कंस्ट्रक्शन एंड फाइनेंसर प्राइवेट लिमिटेड पर ढाई-ढाई करोड़ रुपए का पर्यावरण का उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया था. एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर्यावरण और वन मंत्रालय के साथ आईआईटी दिल्ली के प्रतिनिधियों की एक ज्वाइंट समिति का गठन भी किया था. जिसे इन बिल्डरों से वसूले जाने वाले वास्तविक मुआवजे का निर्धारण करना था.
दरअसल इन बिल्डरों पर पर्यावरण के मानकों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए हरियाणा के एनजीओ किसान उदय समिति ने एनजीटी में शिकायत दर्ज कर इनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी.
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