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CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लगाया जा सकेगा NSA, SC ने खारिज की याचिका

भाषा
Updated: January 24, 2020, 6:48 PM IST
CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर लगाया जा सकेगा NSA, SC ने खारिज की याचिका
न्यायालय का सीएए विरोध पर रासुका लगाने के खिलाफ याचिका पर विचार से इंकार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है.

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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के दौरान कुछ राज्यों और दिल्ली में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लागू किये जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को विचार से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि रासुका लगाने के संबंध में कोई व्यापक आदेश नहीं दिया जा सकता. पीठ ने अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा से कहा कि वह इस मामले में अपनी याचिका वापस ले सकते हैं.

पीठ ने कही ये बात
पीठ ने मनोहर लाल शर्मा से कहा कि रासुका के उल्लंघन के बारे में विवरण देते हुए नई याचिका या नागरिकता संशोधन कानून प्रकरण में लंबित याचिकाओं में अंतरिम आवेदन दायर कर सकते हैं. मनोहर लाल शर्मा ने इस याचिका में रासुका लगाये जाने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिकता पंजी के खिलाफ विरोध कर रही जनता पर दबाव डालने के लिए ही यह कदम उठाया गया है.

दिल्‍ली के उपराज्‍यपाल ने बढ़ाई थी रासुका की अवधि

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने 10 जनवरी को रासुका की अवधि 19 जनवरी से तीन महीने के लिए बढ़ा दी थी. इस कानून के तहत दिल्ली पुलिस को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार प्राप्त है. रासुका के तहत पुलिस किसी भी व्यक्ति को बगैर किसी मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत में रख सकती है.

इस याचिका में मनोहर लाल शर्मा ने गृह मंत्रालय, दिल्ली, उप्र, आंध्र प्रदेश और मणिपुर सरकारों को पक्षकार बनाया था. याचिका में कहा गया है पुलिस को हिरासत में लिये गए व्यक्तियों पर रासुका लगाने की अनुमति देने संबंधी अधिसूचना से संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (अभिव्यक्ति और बोलने की आजादी) तथा अनुच्छेद 21 (जीने के अधिकार) के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है.

याचिका में मुआवजे का था जिक्रयाचिका में इस अधिसूचना को निरस्त करने का अनुरोध किया गया था. याचिका में रासुका के तहत हिरासत में लिये गए व्यक्तियों की समाज में अपमान और प्रतिष्ठा खोने के कारण 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दिलाने का भी अनुरोध किया गया था. देश के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के खिलाफ इस समय विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

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First published: January 24, 2020, 5:29 PM IST
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