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जम्मू-कश्मीर के छात्रों को आर्थिक सहायता देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार

भाषा
Updated: November 27, 2019, 11:32 PM IST
जम्मू-कश्मीर के छात्रों को आर्थिक सहायता देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
इस याचिका में राज्य से आर्टिकल 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के बाद राज्य के छात्रों के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की गयी थी

वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने सीएफआई (CFI) की ओर से पेश करते हुए कहा था कि कश्मीर (Kashmir) के छात्र अपने देश के विभिन्न स्थानों पर स्कूलों और कॉलेजों की फीस नही दे पा रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार (Central Government) ने बैंकिंग प्रणाली पर प्रतिबंध लगाया है.

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  • Last Updated: November 27, 2019, 11:32 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को गैर सरकारी संगठन कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया (Campus front of India) की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. याचिका में जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) में अनुच्छेद 370 (Article 370) के प्रावधानों को खत्म करने के बाद कठिनाई का सामना करने वाले राज्य के छात्रों के लिए आर्थिक सहायता देने की मांग की गयी थी.

केंद्र ने सीएफआई (CFI) की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि यह संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (Popular Front of India) से जुड़ी हुई है जिसका संबंध प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मुवमेंट ऑफ इंडिया (Students Islamic Movement of India) से जुड़ा हुआ है.

इस याचिका पर नहीं करेंगे विचार
न्यायमूर्ति एनवी रमणा, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बीआर गवई की एक पीठ ने कहा कि वह इस याचिका पर विचार नहीं करेंगे. वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने सीएफआई (CFI) की ओर से पेश करते हुए कहा था कि कश्मीर के छात्र अपने देश के विभिन्न स्थानों पर स्कूलों और कॉलेजों की फीस नही दे पा रहे हैं क्योंकि केंद्र सरकार ने बैंकिंग प्रणाली पर प्रतिबंध लगाया है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की तरफ से पेश होते हुए कहा कि कश्मीर (Kashmir) में बैंकिंग प्रणाली कभी बंद नहीं हुई. यहां तक कि वह पांच अगस्त को भी काम कर रहा थी.

केंद्र ने पाबंदियों तक ठहराया था सही
बता दें इससे पहले केन्द्र ने भी 21 नवंबर को अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधान खत्म किये जाने के बाद जम्मू कश्मीर में लगायी गयी पाबंदियों को न्यायोचित ठहराया था. केन्द्र ने कहा था कि एहतियात के तौर पर उठाये गये कदमों की वजह से घाटी में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गयी और न ही सुरक्षा बल को एक भी गोली चलानी पड़ी.

केन्द्र ने कश्मीर घाटी में आतंकी हिंसा का जिक्र किया था और कहा था कि पिछले कई साल से सीमा पार से आतंकवादियों को यहां भेजा जा रहा है, स्थानीय उग्रवादियों और अलगाववादी संगठन ने नागरिकों को बंधक बना रखा था और ऐसी स्थिति में यदि सरकार ने नागरिकों के जीवन की सुरक्षा के लिये एहतियाती कदम नहीं उठाये होते तो यह बहुत ही मूर्खतापूर्ण होता.
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First published: November 27, 2019, 11:32 PM IST
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