Home /News /nation /

एडल्टरी पर महिलाओं को भी होगी सज़ा? संवैधानिक पीठ करेगी फैसला

एडल्टरी पर महिलाओं को भी होगी सज़ा? संवैधानिक पीठ करेगी फैसला

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

मौजूदा कानून के मुताबिक, शादी के बाद किसी दूसरी शादीशुदा महिला से संबंध बनाने पर अभी तक सिर्फ पुरुष के लिए ही सजा का प्रावधान है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
    सुप्रीम कोर्ट ने एडल्टरी यानी शादी से बाहर अवैध संबंध बनाने को लेकर कानून को चुनौती देने वाली याचिका संवैधानिक पीठ (कॉन्स्टिट्यूशनल बेंच) को ट्रांसफर कर दी है. पांच जजों की बेंच इस पर फैसला लेगी. फिलहाल मौजूदा कानून के मुताबिक, शादी के बाद किसी दूसरी शादीशुदा महिला से संबंध बनाने पर अभी तक सिर्फ पुरुष के लिए ही सजा का प्रावधान है.

    भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि जब आपराधिक कानून महिला-पुरुष के लिए समान है, तो फिर सेक्शन 497 में ऐसा क्यों नहीं होता? आईपीसी के सेक्शन 497 पर 1954 में चार जजों की बेंच असहमति जता चुकी है. ऐसे में अब सिर्फ पांच जजों की बेंच इस कानून की वैधता पर पुनर्विचार करेगी.

    सेक्शन 497 के मुताबिक, अभी अगर कोई शादीशुदा मर्द किसी शादीशुदा महिला से शारीरिक संबंध बनाता है, तो इसमें सिर्फ उस मर्द को ही सजा होगी. इस मामले में शादीशुदा महिला पर न तो व्याभिचार (एडल्टरी) करने और न ही बहकाने के आरोप लगेंगे. एडल्टरी के मामले में आरोपी पुरुष के लिए पांच साल की सजा का प्रावधान है.

    इस पिटीशन पर सेक्शन 497 के संवैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं. पिटीशन में कहा गया है कि अगर शादीशुदा पुरुष और शादीशुदा महिला की आपसी सहमति से संबंध बने, तो सिर्फ पुरुष आरोपी कैसे हुआ? पिटीशन में कहा गया है कि 150 साल पुराना ये कानून मौजूदा दौर में बेमानी है. ये कानून उस समय का है, जब महिलाओं की हालत काफी कमजोर थी. इस तरह एडल्टरी के मामलों में ऐसी महिलाओं को पीड़िता का दर्जा मिल गया.

    इटली में रहने वाले केरल मूल के एक सोशल एक्टिविस्ट जोसेफ साइन ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. शुक्रवार को कोर्ट ने इस पिटीशन को पांच जजों की बेंच को रेफर कर दिया है.

    सुप्रीम कोर्ट ने पिटीशन रेफर करते हुए कहा, "खासतौर पर समाजिक प्रगति, बदल चुकी अवधारणा, लैंगिक समानता और लैंगिक संवेदनशीलता को देखते हुए पूर्व फैसलों पर पुनर्विचार की जरूरत है. इस सबके अलावा संविधान के अनुच्छेद 15 में महिलाओं के लिए सकारात्मक अधिकार के पहलू पर अलग ढंग से ध्यान देने की जरूरत है."

    कोर्ट ने कहा कि जीवन के हर तौर-तरीकों में महिलाओं को समान माना गया है. इस मामले में अलग बर्ताव क्यों? जब गुनाह महिला-पुरुष दोनों की रजामंदी से किया गया हो, तो महिलाओं को सुरक्षा या राहत क्यों?

    सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि जब समाज ने प्रगति की है. चीजें बदली हैं. पुरुष और महिलाओं के एक समान अधिकारों की बात हो रही है. तो मौजूदा समय में इस कानून की समीक्षा की जरूरत है.

    ये भी पढ़ें:  शादी से बाहर संबंध रखने पर महिला भी अपराधी? SC करेगा समीक्षा

    Tags: Adultery Law, Supreme Court

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर