SC ने PM केयर्स फंड की कानूनी बाध्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित

SC ने PM केयर्स फंड की कानूनी बाध्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट

PM Cares Fund: याचिकाकर्ता CPIL का कहना है कि पीएम केयर्स फंड में कोई पारदर्शिता नहीं है. वह एक निजी संस्था के तरह काम कर रही है जिसका सी.ए.जी से ऑडिट नहीं कराया जा सकता

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नई दिल्ली. पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) की कानूनी बाध्यता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. एक गैर सरकारी संस्था CPIL ने पीएम केयर्स फंड के गठन को चुनौती दी है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को तीन दिन का समय दिया की वह अपना लिखित जवाब दाखिल करें. उसके बाद अदालत अपना फैसला सुनाएगी.

याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता CPIL का कहना है कि पीएम केयर्स फंड में कोई पारदर्शिता नहीं है. वह एक निजी संस्था के तरह काम कर रही है जिसका सी.ए.जी से ऑडिट नहीं कराया जा सकता और उस पर जानकारी भी सार्वजनिक नहीं हो सकती. सरकार के पास आपदा से निपटने के लिए पहले से ही एक संस्था NDRF मौजूद है. इसलिए पीएम केयर्स फंड का पैसा उसमें ट्रांसफर कर देना चाहिए.

सरकार की दलील
उधर सरकार का कहना है कि दोनों संस्थाएं अलग हैं और दोनों का मकसद अलग है. पीएम केयर्स फंड मौजूदा कानून के तहत बना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल मार्च में ट्वीट के ज़रिये अपील करके कहा था कि कोविड-19 जैसी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात राहत कोष (पीएम-केयर्स फंड) की स्थापना की जा रही है और लोग उसमें दान करें.



ट्रस्ट का गठन
प्रधानमंत्री, PM CARES कोष के पदेन अध्यक्ष और भारत सरकार के रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, निधि के पदेन ट्रस्टी होते हैं. बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के अध्यक्ष (प्रधानमंत्री) के पास 3 ट्रस्टीज को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में नामित करने की शक्ति होगी, जो अनुसंधान, स्वास्थ्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य, कानून, लोक प्रशासन और परोपकार के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे. ट्रस्टी नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति निशुल्क कार्य करेगा.
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