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सुप्रीम कोर्ट ने विधि आयोग के लिए चेयरपर्सन की नियुक्ति पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने आज विधि आयोग को वैधानिक संस्था घोषित करने की याचिका पर सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने आज विधि आयोग को वैधानिक संस्था घोषित करने की याचिका पर सुनवाई की.

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की दलील के मुताबिक 31 अगस्त 2018 को जस्टिस बीएस चौहान का कार्यकाल समाप्त होने के 5 महीने बाद से चेयरपर्सन का पद पिछले 2 सालों से खाली है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 11:24 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को कानून आयोग को वैधानिक निकाय घोषित करने और एक महीने के भीतर पैनल के अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्त करने के लिए केंद्र से निर्देश मांगने की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की. सुप्रीम कोर्ट ने लॉ कमीशन को वैधानिक निकाय घोषित करने और 1 महीने के भीतर लॉ कमीशन के अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्ति करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने आज लॉ कमीशन को वैधानिक संस्था घोषित करने वाली याचिका पर सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. यह याचिका 22 वे विधि आयोग की स्थापना के लिए विधि आयोग और उसके सदस्यों के लिए चेयर पर्सन की नियुक्ति की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी.





याचिका का दावा- लॉ कमीशन काम नहीं कर रहा है
सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने लॉ कमीशन को वैधानिक संस्था घोषित करने के संबंध में केंद्र सरकार को निर्देश देने के लिए दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की. वरिष्ठ एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में दावा किया कि वर्तमान में लॉ कमीशन काम नहीं कर रहा है जिस कारण केंद्र सरकार कानून के विभिन्न पहलुओं पर इस विशेष निकाय के लाभ से वंचित है. चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में संक्षिप्त सुनवाई के बाद सरकार और कानून मंत्रालय को नोटिस जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की दलील के मुताबिक 31 अगस्त 2018 को जस्टिस बीएस चौहान का कार्यकाल समाप्त होने के 5 महीने बाद से चेयरपर्सन का पद पिछले 2 सालों से खाली है. याचिका में कहा गया कि लॉ कमीशन को कानून के विभिन्न पहलुओं के अध्ययन करने और केंद्र को अपनी सिफारिशें देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. कमीशन कानून में अनुसंधान करता है और सुधार करने और नए कानून बनाने के लिए मौजूदा कानूनों की समीक्षा करता है. वही याचिका में यह भी कहा गया है कि लॉ कमीशन काम नहीं कर रहा है ,केंद्र को कानून के विभिन्न पहलुओं पर इस विशिष्ट निकाय की सिफारिशों का लाभ नहीं है ,जो आयोग को इसके अध्ययन और सिफारिश को सिफारिशों के लिए सौंपा गया है.
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