आम्रपाली का रियल्टी कारोबार 'मकड़जाल' की तरह, आवासीय परियोजनाएं अवैध: SC

उच्चतम न्यायालय ने आम्रपाली समूह से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उसकी आवासीय परियोजनाएं पहली नज़र में अवैध लगती हैं और उसका रियल एस्टेट कारोबार 'मकड़जाल' की तरह है.

भाषा
Updated: August 21, 2018, 10:45 PM IST
आम्रपाली का रियल्टी कारोबार 'मकड़जाल' की तरह, आवासीय परियोजनाएं अवैध: SC
आम्रपाली का रियल्टी कारोबार 'मकड़जाल' की तरह, आवासीय परियोजनाएं अवैध: SC (File Photo)
भाषा
Updated: August 21, 2018, 10:45 PM IST
उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को आम्रपाली समूह से कहा कि वो पाक साफ होकर आए. शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में उसकी आवासीय परियोजनाएं पहली नज़र में अवैध लगती हैं और उसका रियल एस्टेट कारोबार 'मकड़जाल' की तरह है.

आम्रपाली को अपनी गिरवी रहित संपत्तियों का ब्योरा प्रदान करने का निर्देश देते हुए शीर्ष अदालत ने ये भी कहा कि समूह पर इतनी अधिक देनदारियां हैं कि उसकी संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त रकम का अधिकारियों, कर और सुरक्षित ऋणदाताओं को भुगतान करने के बाद काफी कम राशि बचेगी.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यू यू ललित की पीठ ने कहा कि भारतीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी) की ओर से लंबित परियोजनाओं के निर्माण के लिए 5000 करोड़ से अधिक रुपए हासिल करने का एकमात्र उपाय है कि आम्रपाली समूह के निदेशकों की निजी संपत्तियां बेच दी जाएं.

पीठ ने सभी निदेशकों का सात दिन में विस्तृत हलफनामा मांगा, जिन्होंने कुछ महीने के लिए भी समूह में सेवा दी. पीठ ने उनकी निजी संपत्तियों और बैंक खातों का भी ब्योरा मांगा.

पीठ ने कहा, 'पहली नजर में ऐसा लगता है कि समूह की नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सभी आवासीय संपत्तियां जहां लोगों को कब्जा दिया गया है, वो अवैध हैं क्योंकि किसी के पास कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं है.'

पीठ ने साफ कर दिया कि वो सही निदेशकों को नहीं छुएगी. उसने कहा कि वो इसलिए ब्योरा मांग रही है क्योंकि उसे संदेह है कि 'व्यक्ति के पीछे व्यक्ति हैं.'

पीठ ने कहा, 'एकबार निदेशकों और उनकी संपत्ति का ब्योरा मिलने के बाद हम उचित आदेश देंगे. हम साफ कर देना चाहते हैं कि हम सही निदेशकों के खिलाफ नहीं हैं.' पीठ ने समूह को निर्देश दिया कि वो उन आठ कंपनियों का ब्योरा दे जो उन कंपनियों की सूची में शामिल नहीं थी, जो पहले सौंपी गई थीं.

जहां घर खरीददारों को कब्ज़ा दिया गया है उस बारे में न्यायालय ने कहा कि कानूनी रूप से कहा जाए तो स्वामित्व अधिकारों का अंतरण नहीं किया गया क्योंकि कंप्लीशन प्रमाण पत्र नहीं है. पीठ ने कहा, 'आम्रपाली अपनी बकाया देनदारियों को चुकाने की ज़िम्मेदारियों से नहीं बच सकते.'

गिरवी रहित संपत्तियों के आंकड़े को देखने के बाद पीठ ने कहा, 'आप बेदाग होकर आएं, न कि दागदार हाथों के साथ. आपको हर देनदारी का ब्योरा देना है. इसमें खरीदारों और सुरक्षित ऋणदाताओं पर देनदारी भी शामिल है.'
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