प्रवासी मजदूरों के पैदल घर लौटने पर सुप्रीम कोर्ट का जवाब- किसी को जाने से रोकना संभव नहीं

प्रवासी मजदूरों के पैदल घर लौटने पर सुप्रीम कोर्ट का जवाब- किसी को जाने से रोकना संभव नहीं
बिहार में देश के अलग-अलग हिस्सों से 10 लाख से ज्यादा मजदूर घर लौटे हैं.

सुप्रीम कोर्ट (supreme court) में याचिका दायर कर औरंगाबाद में ट्रैक पर ट्रेन से कटकर मजदूरों की मौत का मामला उठाया गया

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए इन दिनों देश भर में लॉकडाउन लागू है. ऐसे में कई प्रवासी मजदूर (Migrant Workers) पैदल भी घर लौट रहे हैं. इस मुद्दे पर आज सुनवाई के दौरान सुप्राीम कोर्ट ने कहा कि इन्हें जाने से रोकना संभव नहीं है. जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस संजय कौल की पीठ ने कहा, 'आप ऐसे लोगों को कैसे रोक सकते हैं जो पैदल चलना चाहते हैं. क्या कोई उन्हें रोक सकता है. किसी के लिए उन्हें रोकना संभव नहीं है.'

मजदूरों को धैर्य रखना चाहिए
प्रवासी मजदूरों को रोकने के सवाल पर केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकारें ट्रांसपोर्ट का इंतजाम कर रही हैं, लेकिन लोग गुस्से में पैदल चल रहे हैं. वो इतंजार नहीं करना चाहते हैं. उन्हें धैर्य रखना चाहिए. उन्होंने ये भी कहा कि सरकार उनसे पैदल न चलने का सिर्फ अनुरोध कर सकती है.

पैदल चलने वालों पर कैसे नजर रखे?



केस दायर करने वाले वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट में औरंगाबाद में ट्रेन से कटकर मजदूरों की मौत का मामला उठाया. उन्होंन कहा कि इस घटना में 16 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई. इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'कोई कैसे इन्हें रेलवे ट्रैक पर सोने से मना कर सकता है. कोर्ट ने ये भी कहा कि ये संभव नहीं है कि पैदल चलने वाले मजदूरों को कोर्ट नजर रखे.'



याचिका हुई खारिज
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कहा कि उनकी ये सारी रिपोर्ट न्यूजपेपर की क्लिपिंग पर आधारित है. आप ऐसे में कैसे उम्मीद करते हैं कि कोर्ट इस तरह का आदेश पारित करेगा, इस मामले में सरकारों को काम करने दिया जाए और एक्शन लेने दिया जाए. कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि लोग सड़क पर जा रहे हैं. पैदल चल रहे हैं. नहीं रुक रहे तो हम क्या सहयोग कर सकते हैं?

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First published: May 15, 2020, 2:10 PM IST
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