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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दोषमुक्ति के फैसले में हस्तक्षेप सही नहीं, जब तक अदालत का रुख गलत ना हो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- दोषमुक्ति के फैसले में हस्तक्षेप सही नहीं, जब तक अदालत का रुख गलत ना हो

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को दोष मुक्त करने के फैसले में हस्तक्षेप ठीक नहीं, अगर यह न लगे कि अदालत द्वारा अपनाया गया रुख गलत है. (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को दोष मुक्त करने के फैसले में हस्तक्षेप ठीक नहीं, अगर यह न लगे कि अदालत द्वारा अपनाया गया रुख गलत है. (File Photo)

उच्चतम न्यायालय ने साथ ही कहा, 'अगर दो विचार समान रूप से संभव हैं, तो भी बरी करने के फैसले को रद्द करने की अनुमति महज इसलिए नहीं दी जा सकती, क्योंकि सक्षम अदालत को दोषसिद्धि का रास्ता ज्यादा उचित लगा.' अभियोजन पक्ष के अनुसार, जोधपुर के आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी और सबूत छिपाने के लिए उसको जला दिया था.

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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोपी शख्स को बरी करने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि किसी को दोष मुक्त करने के फैसले में हस्तक्षेप करने की अनुमति तब तक नहीं दी जा सकती जब तक कि यह न लगे कि अदालत द्वारा अपनाया गया रुख गलत है. शीर्ष अदालत ने राजस्थान उच्च न्यायालय के सितंबर 2009 में दिए फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी.

राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपनी पत्नी की हत्या के आरोपी शख्स को दोषी ठहराने के निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उसे बरी कर दिया था. न्यायमूर्ति बी.आर गवई और न्यायमूर्ति पी.एस नरसिम्हा ने अपने हाल के फैसले में कहा, ‘बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील में हस्तक्षेप करने की गुंजाइश बहुत कम होती है. जब तक यह न पाया जाए कि अदालत द्वारा अपनाया गया रुख असंभव या गलत है, तब तक बरी करने के फैसले के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है.’

उच्चतम न्यायालय ने साथ ही कहा, ‘अगर दो विचार समान रूप से संभव हैं, तो भी बरी करने के फैसले को रद्द करने की अनुमति महज इसलिए नहीं दी जा सकती, क्योंकि सक्षम अदालत को दोषसिद्धि का रास्ता ज्यादा उचित लगा.’ अभियोजन पक्ष के अनुसार, जोधपुर के आरोपी ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी और सबूत छिपाने के लिए उसको जला दिया था. निचली अदालत ने जनवरी 1986 में उसे दोषी ठहराया था.इसके बाद उसने इस फैसले के खिलाफ राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील की थी. उच्च न्यायालय ने आरोपी शख्स को मामले में बरी कर दिया था.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि बरी किए जाने के आदेश में अकारण हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए. पत्नी के साथ क्रूरता के एक मामले में पति को दोषमुक्त किए जाने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल रखा था. न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति एसआर भट की पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के मार्च 2019 के फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के तहत कथित अपराध के लिए व्यक्ति को दोषी ठहराने के आदेश को बहाल कर दिया था.

Tags: Law, Supreme Court

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