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जमीन विवाद में अब सिग्नेचर की कार्बन कॉपी को भी सबूत मानेगा कोर्ट, पढ़ें पूरा मामला

News18Hindi
Updated: October 30, 2019, 12:34 PM IST
जमीन विवाद में अब सिग्नेचर की कार्बन कॉपी को भी सबूत मानेगा कोर्ट, पढ़ें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक गुप्‍ता की पीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्‍य कानून की धारा-62 के तहत किसी सबूत की हस्‍ताक्षर की हुई कार्बन कॉपी को प्राथमिक साक्ष्‍य माना जाएगा.

जस्टिस दीपक गुप्‍ता (Justice Deepak Gupta) की अध्‍यक्षता वाली शीर्ष अदालत (Supreme Court) की पीठ ने जमीन विवाद के एक मामले में दिए पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि दोनों पक्षों की ओर से हस्‍ताक्षर की हुई कार्बन कॉपी वास्‍तविक साक्ष्‍य (Original Evidence) के बराबर मजबूत सबूत मानी जाती है.

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  • Last Updated: October 30, 2019, 12:34 PM IST
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(उत्‍कर्ष आनंद)

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने जमीन विवाद (Land Dispute) के एक मामले में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) के फैसले को पलट दिया है. कोर्ट ने कहा कि हस्‍ताक्षर की हुई कार्बन कॉपी (Signed Carbon Copy) भी कोर्ट में मान्‍य सबूत (Evidence) होगी. जस्टिस दीपक गुप्‍ता की अध्‍यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा कि दोनों पक्षों के हस्‍ताक्षर वाली कार्बन कॉपी भी वास्‍तविक सबूत (Original Evidence) के बराबर मजबूत साक्ष्‍य माना जाएगा और कोर्ट इसके आधार पर सुनवाई कर सकता है.

हाईकोर्ट ने हस्‍ताक्षर की हुई कार्बन कॉपी को सबूत मानने से कर दिया था इनकार
पीठ ने कहा कि भारतीय साक्ष्‍य कानून (Indian Evidence Act) की धारा-62 (Section-62) के तहत किसी सबूत की हस्‍ताक्षर की हुई कार्बन कॉपी को प्राथमिक साक्ष्‍य (Primary Evidence) माना जाएगा. बता दें कि पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में कार्बन कॉपी को सबूत मानने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के हस्‍ताक्षर की हुई कार्बन कॉपी को धारा-62 के तहत वास्‍तविक दस्‍तावेज नहीं माना जा सकता है. जस्टिस दीपक गुप्‍ता की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को पलट दिया है.

शीर्ष अदालत ने मामला वापस हाईकोर्ट को भेजते हुए दोबारा परीक्षण का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि पंजाब व हरियाणा उच्‍च न्‍यायालय का आदेश गलत है. साथ ही यह फैसला धारा-62 के प्रावधानों के खिलाफ भी है. मामले में पेश की गई कार्बन कॉपी को भी उसी प्रक्रिया के जरिये तैयार किया गया है, जैसे वास्‍तविक दस्‍तावेज तैयार किए गए थे. इसके बाद दोनों पक्षों के इस पर हस्‍ताक्षर करने के बाद कार्बन कॉपी की प्रकृति वास्‍तविक दस्‍तावेज जैसी हो गई. शीर्ष अदालत ने कहा कि धारा-62 में एक प्रावधान वास्‍तविक दस्‍तावेज की प्रति बनाने और प्रिंटिंग को लेकर भी बात करता है. पीठ ने मामला वापस हाईकोर्ट को भेजते हुए दोबारा परीक्षण का निर्देश दिया है.

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First published: October 30, 2019, 12:02 PM IST
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