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  • कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्‍चों को मिले पीएम केयर फंड की योजना का लाभ: सुप्रीम कोर्ट

कोरोना महामारी में अनाथ हुए बच्‍चों को मिले पीएम केयर फंड की योजना का लाभ: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश. (File pic)

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश. (File pic)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक जून को केंद्र से कोविड-19 से अनाथ हुए बच्चों के लिए हाल में शुरू किए गए पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना पर सूचना मांगी थी.

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    नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 (Covid 19 Pandemic) के चलते अपने माता-पिता को गंवा चुके बच्चों की पहचान में अब और देरी बर्दाश्त नहीं है. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि अनाथ बच्चो से संबंधित योजनाओं का लाभ असली लाभार्थियों तक पहुंचे और ये योजनाएं बस कागजों पर नहीं रहें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन सभी बच्‍चों को पीएम केयर्स फंड (Pm Cares Fund) के तहत लाभकारी योजना का लाभ मिलना चाहिए. इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकारों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने और मार्च, 2020 के बाद अनाथ हुए बच्चों की संख्या का ब्योरा देने का निर्देश दिया.

    जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरूद्ध बोस की पीठ ने जिलाधिकारियों को अनाथ बच्चों की पहचान के लिए जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को पुलिस, नागरिक समाज, ग्राम पंचायतों, आंगनवाडी एवं आशाकर्मियों की मदद लेने के लिए जरूरी दिशानिर्देश जारी करने का निर्देश दिया.

    सुप्रीम कोर्ट ने एक जून को केंद्र से कोविड-19 से अनाथ हुए बच्चों के लिए हाल में शुरू किए गए पीएम -केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना पर सूचना मांगी थी और राज्यों को ऐसे बच्चों की पहचान व उनसे जुड़े कल्याणकारी कदमों के संदर्भ में नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया था. एनसीपीसीआर ने अपने हलफनामे में कहा कि राज्यों से मिले आंकड़े के अनुसार 9,346 बच्चों के माता-पिता या दोनों में से एक की कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु हुई है. हलफनामे के अनुसार 1,742 बच्चों के माता पिता दोनों की मृत्यु हो गई है जबकि 7, 464 बच्चों के माता पिता में से एक का निधन हुआ है.

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने बताया कि पीएम केयर्स फंड के अंतर्गत उन बच्‍चों को कवर किया जा रहा है जिनके दोनों पैरेंट की कोरोना महामारी में मौत हुई या एक बचे हुए पैरेंट की कोरोना से मौत हुई. इस योजना के अंतर्गत 23वें साल में इन बच्‍चों को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद राशि मिलेगी.

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह किशोर न्याय (बाल देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम एवं नियमावली में उपलब्ध प्रणालियों के अतिरिक्त होगा. पीठ ने कहा, ‘मार्च, 2020 के बाद जिन बच्चों ने अपने माता-पिता खोए हैं, उनकी पहचान में अब और विलंब बर्दाश्त नहीं है.’

    पीठ ने भी स्पष्ट किया कि उसके आदेश में वे सभी बच्चे आते हैं जो इस अवधि में कोविड या किसी अन्य कारण से अनाथ हुए. जस्टिस राव ने कहा, ‘दरअसल हम जो सोच रहे हैं वह यह कि सभी बच्चों की देखभाल कराई जाए, भले ही वे कोविड या गैर कोविड के कारण अनाथ हुए हों. हम आदेशों को बस उन अनाथों तक सीमित नहीं कर सकते जिन्होंने कोविड-19 से अपने माता-पिता को गंवाया है.’

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