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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसियों में CCTV लगाने के मामले पर केंद्र को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाई है. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाई है. (फाइल फोटो)

CCTV Installation in Central Investigation Agencies: उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया है कि केंद्र तीन सप्ताह के भीतर कोर्ट को सूचित करे कि केंद्रीय एजेंसियों के लिए कितना फंड आवंटित किया गया और सीसीटीवी कब लगाए जाएंगे.

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नई दिल्ली. सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), एनसीबी (NCB) और एनआईए (NIA) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों में CCTV लगाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हमें ऐसा लग रहा है कि सरकार अपने पैर पीछे खींच रही है. अदालत ने कहा कि ये नागरिकों के मौलिक अधिकारों से संबंधित है और अदालत नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर चिंतित है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कहा कि वो उसके सुनवाई टालने को बहाने को मंजूर नहीं कर रहा है.

वहीं शीर्ष न्यायालय ने थानों में सीसीटीवी लगाने को लेकर बिहार और मध्य प्रदेश सरकार को भी फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कि आपको अदालत के आदेश का सम्मान नहीं है. उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया है कि केंद्र तीन सप्ताह के भीतर कोर्ट को सूचित करे कि केंद्रीय एजेंसियों के लिए कितना फंड आवंटित किया गया और सीसीटीवी कब लगाए जाएंगे. दरअसल पिछली सुनवाई में जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने थानों में सीसीटीवी लगाने का अपना फैसला परमवीर सिंह सैनी की याचिका पर दिया था. अदालत ने 2018 में मानवाधिकारों का उल्लंघन रोकने के लिए सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था

याचिका में कही गई थी ये बात
सैनी ने गवाहों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. सुप्रीम कोर्ट ने साथ ही कहा है कि थानों के बाहरी हिस्से में लगने वाले सीसीटीवी कैमरे नाइट विजन वाले होने चाहिए. और साथ ही सरकार से कहा था कि जिन थानों में बिजली और इंटरनेट नहीं वहां वे यह सुविधा उपलब्ध कराएं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सौर/पवन ऊर्जा समेत बिजली मुहैया कराने के किसी भी तरीके का उपयोग करके जितनी जल्दी हो सके बिजली दी जाए.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हिरासत में पूछताछ के दौरान आरोपी के घायल होने या मौत होने पर पीड़ित पक्ष को शिकायत करने का अधिकार है. सीसीटीवी फुटेज से ऐसी शिकायतों की जांच में आसानी होगी.



सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में प्रताड़ना से जुड़े एक मामले के निपटारे के दौरान जुलाई में 2017 के एक केस पर ध्यान दिया था जिसमें उसने सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया था जिससे मानवाधिकारों के हनन की जांच की जा सके. साथ ही घटनास्थल की वीडियोग्राफी कराई जा सके. इसी के साथ कोर्ट ने हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को इसके लिए एक समिति बनाने को भी कहा था. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि व्यक्ति का अधिकार है कि उसके मानवाधिकारों की रक्षा हो.
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