प्रशांत भूषण के खिलाफ 11 साल पुराने अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मांगी AG से मदद, 12 अक्टूबर को सुनवाई

प्रशांत भूषण के खिलाफ 11 साल पुराने अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मांगी AG से मदद, 12 अक्टूबर को सुनवाई
प्रशांत भूषण की फाइल फोटो

Prashant Bhushan Contempt Of Court Case: वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ यह मामला नवंबर 2009 का है. इसमें अदालत ने भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल को एक अवमानना नोटिस जारी किया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 4:03 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के वकील और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ साल 2009 में अदालत की अवमानना के मामले (Contempt of Court) में सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से राय मांगी है. अदालत ने कहा है कि वह इस मामले पर विचार करें. साथ ही सवाल बनाने में मदद करें. अब इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जस्टिस एएम खानविलकर, दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना की तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. हाल ही में सेवानिवृत्त हुए जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुआई वाली पीठ ने इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे के पास भेजते हुए कहा था कि वह इसे उचित पीठ के पास भेजें. इस मामले की सुनवाई में रिटायर्ड जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा था कि वह सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उनके पास समय कम है. इस मामले को संवैधानिक पीठ के पास भेजा जाए या नहीं, इसका फैसला नई बेंच करेगी.

सेवानिवृत्त जज मिश्रा द्वारा 25 अगस्त की सुनवाई में कहा गया था कि नई पीठ यह देखेगी कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अदालत की अवमानना को कैसे संतुलित किया जा सकता है. यही पीठ अब यह फैसला भी करेगी कि इसे बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं.




11 साल पुराना मामला
बता दें यह मामला 11 साल पहले तहलका पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू से जुड़ा है. इस मामले में अगली सुनवाई 10 सितंबर को होनी थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा था कि इसमें न केवल अटॉर्नी, बल्कि एमिकस क्यूरी की मदद भी जरूरी हो सकती है.

गौरतलब है कि शीर्ष न्यायालय में भूषण के खिलाफ अवमानना के दो मामले थे. एक में फैसला आ चुका है जबकि दूसरा मामला नवंबर 2009 का है. इसमें अदालत ने भूषण और पत्रकार तरुण तेजपाल को एक अवमानना नोटिस जारी किया था. एक समाचार पत्रिका में कुछ मौजूदा एवं कुछ पूर्व न्यायाधीशों के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर यह नोटिस जारी किया गया था.
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