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    सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवाद मामलों में गुजारा भत्ते के भुगतान के लिए दिए खास दिशा-निर्देश, अब पति-पत्नी को बतानी होगी इनकम

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India)
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India)

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वैवाहिक विवाद मामलों में देश की विभिन्न अदालतों द्वारा अंतरिम मुआवजा और गुजारा भत्ते की राशि के निर्धारण में एकरूपता लाने के इरादे से दिशा-निर्देश जारी किये.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 5, 2020, 11:13 AM IST
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    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने वैवाहिक विवाद मामलों में देश की विभिन्न अदालतों द्वारा अंतरिम मुआवजा और गुजारा भत्ते की राशि के निर्धारण में एकरूपता लाने के इरादे से बुधवार को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये. जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि ओवरलैपिंग अधिकार क्षेत्र और परस्पर विरोधी आदेशों की समस्या से निकलने के लिए कुछ निर्देश देने की आवश्यकता थी.

    शीर्ष अदालत ने ओवरलैपिंग अधिकार क्षेत्र, अंतरिम गुजारा भत्ते का भुगतान, गुजारा भत्ते की राशि निर्धारित करने का आधार, गुजारा भत्ते के भुगतान की तारीख का निर्धारण और गुजारा भत्ते के आदेशों पर अमल जैसे बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किये हैं. अधिकार क्षेत्र ओवरलैपिंग होने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि अगर कोई पक्ष अलग-अलग कानून के तहत एक के बाद एक दावे करता है तो अदालत बाद की कार्यवाही में किसी प्रकार की राशि का निर्धारण करते समय पहले की कार्यवाही में निर्धारित राशि को समायोजित कर देगी या इसे अलग कर देगी.

    आदेशों की जानकारी देना अनिवार्य 
    पीठ ने गुजारा भत्ते के लिए बाद में शुरू की गयी कार्यवाही में परस्पर विरोधी आदेशों से बचने के लिए निर्देश दिया कि आवेदक गुजारा भत्ते की पहले की कार्यवाही और उसमें दिये गये आदेशों की जानकारी देगा. अदालत ने कहा, 'आवेदक के लिए दूसरी कार्यवाही शुरू करते समय पहली कार्यवाही और उसमें दिये गये आदेशों की जानकारी देना अनिवार्य है. अगर पहली कार्यवाही में दिये गये आदेश में किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता हुई तो इसके लिए उक्त पक्ष को पहले कार्यवाही वाली अदालत में ही जाना होगा.'
    अंतरिम गुजारा भत्ते के भुगतान के बारे में अदालत ने कहा कि गुजारा भत्ते से संबंधित सारी कार्यवाही में दोनों पक्षों को हलफनामे पर अपनी संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी और देश भर में संबंधित कुटुंब अदालत, जिला अदालत या मजिस्ट्रेट की अदालत में लंबित कार्यवाही का विवरण भी फैसले के साथ संलग्न करना होगा. गुजारा भत्ते की राशि का निर्धारण करने के पहलू पर शीर्ष अदालत ने कहा कि संबंधित अदालत इस फैसले में निर्धारित आधारों पर विचार करेंगे.



    आवेदन दायर करने की तारीख से गुजारा भत्ते का भुगतान करना होगा
    अदालत ने स्पष्ट किया कि ये पहलू ही पूरे नहीं हैं और संबंधित अदालत अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए किसी अन्य पहलू पर भी विचार कर सकती है, जो उसे पेश मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में प्रासंगिक लगते हों. अदालत ने इस पहलू पर भी विचार किया कि गुजारा भत्ता किस तारीख से देना होगा. अदालत ने कहा कि इसके लिए आवेदन दायर करने की तारीख से गुजारा भत्ते का भुगतान करना होगा.

    शीर्ष अदालत ने कहा कि धन से संबंधित डिक्री लागू कराने के लिए दीवानी प्रक्रिया संहिता में उपलब्ध प्रावधानों के जरिये दीवानी हिरासत जैसे उपाय करके संपत्ति जब्त कराने या गुजारा भत्ते का आदेश या डिक्री किसी भी दीवानी अदालत की डिक्री की तरह से लागू करायी जा सकती है

    न्याय मित्र नियुक्त किया
    अदालत ने कहा कि इस फैसले की प्रति शीर्ष अदालत के सेक्रेटरी जनरल सभी हाई कोर्ट्स के रजिस्ट्रार को प्रेषित करेंगे जो राज्यों में सभी जिला जजों के पास इसे भेजेंगे. यह फैसला जागरूकता पैदा करने और अमल के लिए सभी जिला अदालतों, कुटुंब अदालतों, न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालतों की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा.

    शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र के एक वैवाहिक मामले में यह फैसला सुनाया. इस मामले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के अंतर्गत पत्नी और बेटे के लिए गुजारा भत्ते का सवाल उठाया गया था. अदालत ने इस मामले में पहले वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन और अनीता शिनॉय को अंतरिम गुजारा भत्ते के भुगतान के बारे में दिशा निर्देश तैयार करने मे मदद के लिए न्याय मित्र नियुक्त किया था.
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