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सेना में महिला अधिकारियों को मिलेगा स्थायी कमीशन, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई मुहर

एहतेशाम खान | News18Hindi
Updated: February 17, 2020, 12:10 PM IST
सेना में महिला अधिकारियों को मिलेगा स्थायी कमीशन, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई मुहर
कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के प्रति माइंडसेट बदलने की जरूरत है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सेना में महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकररा रखा है.

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  • Last Updated: February 17, 2020, 12:10 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी  कमीशन (Commission To Women) मिलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को कमांड पोस्टिंग मिलनी चाहिए, ये उनका अधिकार है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि महिलाओं को लेकर सेना और केंद्र सरकार को अपनी मानसिकता बदलनी होगी. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि पुरुषों की तरह महिलाओं को भी स्थाई कमीशन या परमानेंट कमीशन मिलेगा. बता दें कि  केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी.  सरकार का कहना था कि महिलाओं को कमांड पोस्टिंग नहीं दी जा सकती. उनका तर्क था कि उसका दुश्मन देश फायदा उठा सकते हैं. साथ ही सेना के यूनिट में ज़्यादातर जवान ऐसी पृष्टभूमि से आते हैं कि महिला के लिए कमांड करना मुश्किल हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
केस की सुनवाई करके हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जम कर फटकार लगाई. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में महिलाओं के साथ कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. साथ ही कहा है कि पुरुषों की तरह महिलाओं को भी अब सारे अधिकार मिलने चाहिए. कोर्ट ने कहा कि महिलाओं के प्रति माइंडसेट बदलने की जरूरत है. 30 फीसदी महिलाएं मोर्चे पर तैनात है. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तान्या शेरगिर और कैप्टन मधुमिता का भी उधारण दिया.

फैसले की खास बातें



>इसके अलावा कोर्ट ने अपने आदेश में ये भी कहा है कि महिलाओं को कमांड पोजिशन भी मिलेगा. जो भी महिला उस काम के लिए सक्षम हैं उनको कमांड पोजिशन भी मिलना चाहिए.

>सुप्रीम कोर्ट ने आज के फैसले में केंद्र सरकार और सेना के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा है कि जब 2010 में दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने उस पर कोई रोक नहीं लगाई थी तब से ही उस फैसले को लागू होना चाहिए था. सरकार का तर्क की महिला शारीरिक रूप से सक्षम नहीं होती, उन्हें लड़ाई के लिए नहीं भेजा जा सकता क्योंकि दुश्मन उसका गलत फायदा उठाएंगे, गांव के पृष्टभूमि से आने वाले फौजी महिला के अधीन काम नहीं करेंगे या महिलाओं पर परिवार को बोझ होता है.ये सारी बातें परेशान करने वाली हैं. ये महिला का अपमान है.

>कोर्ट ने कहा कि सेना और सरकार को अपनी मानसिकता बदलनी होगी. महिलाओं को रूढ़िवादी नज़रिए से नहीं देखा जा सकता. सरकार को सेना में महिलाओं को मुख्यधारा में लाने के लिए काम करना चाहिए.

>कोर्ट ने अपने फैसले में कर्नल सोफिया कोरेशी, कैप्टन भावना कस्तूरी और अन्य महिलाओं का ज़िक्र किया जिन्होंने सेना का नाम रौशन किया है.  कोर्ट ने कहा कि भारतीय सेना की महिलाएं सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान जैसे खतरनाक मिशन में काम कर चुकी हैं. इसलिए उनके खिलाफ भेदभाव नहीं किया जा सकता.

>सुप्रीम कोर्ट का आदेश सरकार को तीन महीने के अंदर लागू करना होगा. सेना के बाद एयर फोर्स और नेवी का मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

>कोर्ट ने ये भी कहा कि जिन महिला ऑफिसर ने 14 साल की सर्विस कर ली है, उन्हें 20 साल तक सेना में सेवा करने की अनुमति दी जाए. इसके अलावा ये भी कहा कि 20 साल की नौकरी के बाद उन्हें पेंशन की भी सारी सुविधाएं मिले.

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First published: February 17, 2020, 10:52 AM IST
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