कोरोना ने छीना माता-पिता का साया तो सुप्रीम कोर्ट बना सहारा, आदेश दिया- नहीं रुकनी चाहिए मासूमों की शिक्षा

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (NCPCR) ने कहा था कि उन्हें मई में शिकायतें मिली हैं कि निजी संस्थाएं और लोग सक्रिय होकर प्रभावित बच्चों का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं.

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (NCPCR) ने कहा था कि उन्हें मई में शिकायतें मिली हैं कि निजी संस्थाएं और लोग सक्रिय होकर प्रभावित बच्चों का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं.

Supreme Court of Orphan Kids: चुनाव आयोग ने बताया था कि देश में 3 हजार 621 बच्चे अनाथ हो गए, जबकि 26 हजार 176 बच्चों ने अपने किसी एक पालक को खो दिया. इस दौरान ऐसे बच्चों की संख्या 274 रही, जिन्हें उनके करीबियों ने छोड़ दिया था.

  • Share this:

नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के चलते अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने मंगलवार को आदेश दिया कि गैरकानूनी तरीके से बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया कर रहे एनजीओ (NGO) और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. इसके अलावा राज्य सरकारों से सरकारी और निजी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के संबंध में प्रावधान बनाने के आदेश दिए हैं, ताकि उनकी शिक्षा जारी रहे.

जस्टिस एल. नागेश्वर राव और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने आदेश दिया, 'राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को अवैध रूप से बच्चा गोद लेने में लिप्त एनजीओ/लोगों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाते हैं. जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 (JJ) के प्रावधानों के विपरीत प्रभावित बच्चों को गोद लेने की अनुमति नहीं है.'

यह भी पढ़ें: एक साल में अनाथ हो गए 3621 मासूम, 30 हजार से ज्यादा बच्चों को मदद की दरकार: NCPCR

राष्ट्रीय बाल अधिकार आयोग (NCPCR) ने कहा था कि उन्हें मई में शिकायतें मिली हैं कि निजी संस्थाएं और लोग सक्रिय होकर प्रभावित बच्चों का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं. आयोग ने बताया था कि ऐसे लोग दावा कर रहे हैं वे गोद लेने की प्रक्रिया में बच्चों और परिवारों की मदद करना चाहते हैं. आयोग ने इसके संबंध में चिंता जाहिर की थी.
आयोग ने बताया था कि देश में 3 हजार 621 बच्चे अनाथ हो गए, जबकि 26 हजार 176 बच्चों ने अपने किसी एक पालक को खो दिया. इस दौरान ऐसे बच्चों की संख्या 274 रही, जिन्हें उनके करीबियों ने छोड़ दिया था. आयोग ने अदालत को जानकारी दी थी कि 30 हजार 71 बच्चों को 'देखभाल और सुरक्षा की जरूरत है.' इनमें से लड़कों की संख्या 15 हजार 620 है. वहीं, लड़कियां 14 हजार 447 हैं. इस समूह में 4 ट्रांसजेंडर हैं.

पहचान की जाए और मिले मदद

अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी उन योजनाओं का लाभ बच्चों को बगैर देरी के मिले, जिनके वे हकदार हैं. साथ ही बेंच ने सरकारों को पैरेंट्स को खोने वाले बच्चों की पहचान करने के लिए भी कहा था. कहा गया था कि प्रभावित बच्चों की पहचान चाइल्ड लाइन (1098), स्वास्थ्य अधिकारियों, पंचायती राज संस्थाएं, पुलिस अधिकारियों और एनजीओ आदि के जरिए की जा सकती है.



डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट (DCPU) को आदेश दिए गए हैं कि वे पैरेंट्स की मृत्यु की खबर पाकर प्रभावित बच्चे और अभिवावक से तुरंत मिलें. साथ ही डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर को परिवार को अपने और एक स्थानीय अधिकारी का कॉन्टेक्ट नंबर देने के आदेश दिए गए हैं. साथ ही जिम्मेदारों को महीने में कम से कम एक बार नियमित जानकारी हासिल करने के निर्देश दिए गए हैं.


मामले की सुनवाई 27 जुलाई को होगी. साथ ही आदेश में कहा गया है कि एमिकस क्यूरी एड्वोकेट गौरव अग्रवाल आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड, दिल्ली के एनसीटी, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर की तरफ से नियुक्त किए गए नोडल अधिकारियों से संपर्क करेंगे. इस दौरान वे पैरेंट्स को खोने से दुखी बच्चों के कल्याण को लेकर किए जा रहे कामों की जानकारी लेंगे और रिपोर्ट सौंपेंगे.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज