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यमुना में प्रदूषण पर SC सख्त, दिल्ली जल बोर्ड की याचिका पर हरियाणा-CPCB को भेजा नोटिस

यमुना नदी में हर साल दिसंबर से फरवरी के बीच अमोनिया की मात्रा में बढ़ोतरी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित निगरानी समिति ने गंभीरता से लिया है. (PTI)
यमुना नदी में हर साल दिसंबर से फरवरी के बीच अमोनिया की मात्रा में बढ़ोतरी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित निगरानी समिति ने गंभीरता से लिया है. (PTI)

दिल्ली जल बोर्ड का आरोप था कि हरियाणा से गंदा पानी आ रहा है. इस पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा है, जो यमुना को प्रदूषित कर रही है. यमुना में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया. कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा को न्यायमित्र (Amicus curiae) नियुक्त किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 13, 2021, 4:47 PM IST
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नई दिल्ली. यमुना नदी में प्रदूषण को लेकर दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हरियाणा सरकार और सेंट्रल पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) को नोटिस जारी किया है. दिल्ली जल बोर्ड का आरोप था कि हरियाणा से गंदा पानी आ रहा है. इस पानी में अमोनिया की मात्रा ज्यादा है, जो यमुना को प्रदूषित कर रही है. प्रदूषित यमुना के पानी के इस्तेमाल से कैंसर फैलने का खतरा है.

यमुना में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया. कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा को न्यायमित्र (Amicus curiae) नियुक्त किया.

वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा, ‘हम बगैर किसी बहस के नोटिस जारी कर रहे हैं. हम समूची यमुना नदी में प्रदूषण के मामले का स्वत: संज्ञान ले रहे हैं.’ न्यायमित्र मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि उन्हें हरियाणा में अमोनिया शोधन संयंत्र रखना है. राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने भी कहा था कि सोनीपत में उनका एसटीपी काम नहीं कर रहा है. बेंच ने जानना चाहा कि प्रदूषक कम करने के लिये उन्हें क्या करना चाहिए.



अदालत ने दिल्ली जल बोर्ड से कहा कि इस याचिका की प्रति और नोटिस की तामील हरियाणा पर करे, ताकि वह अपना जवाब दाखिल कर सके. इसके साथ ही बेंच ने इस मामले को मंगलवार के लिये सूचीबद्ध कर दिया.



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यमुना नदी में हर साल दिसंबर से फरवरी के बीच अमोनिया की मात्रा में बढ़ोतरी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित निगरानी समिति ने गंभीरता से लिया है. यमुना निगरानी समिति ने केंद्रीय प्रदूषण नियंणत्र बोर्ड (सीपीसीबी) को नदी में अमोनिया बढ़ने के मुख्य श्रोत (कारण) का पता लगाने और सुधार के लिए समुचित कदम उठाने को कहा है.

पिछले साल पांच दिन चले यमुना की सफाई अभियान में अकेले दिल्ली से ही लगभग 600 टन कचरा, प्लास्टिक की थैलियां और दूसरी गंदगी 200 ट्रकों में लादी गई. दिल्ली में यमुना के तट पर लगभग 65000 झुग्गी-झोपड़ियां हैं. इनमें 3 से 4 लाख लोग रहते हैं. ये बसावट वजीराबाद बैराज से ही शुरू हो रही है. सबसे बड़े नजफगढ़ नाले समेत 17 नाले दिल्ली के एक करोड़ से ज्यादा निवासियों और एक लाख औद्योगिक इकाइयों का लगभग 7.15 करोड़ गैलन गंदा पानी इस नदी में पहुंचता है.

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समिति ने मीडिया में आई उस खबर पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया है जिसमें कहा गया है कि वजीराबाद के पास यमुना नदी में अमोनिया का स्तर बढ़कर 7 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) हो गया, जबकि तय मानक के हिसाब से यह 0.8 पीपीएम से अधिक नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही, दिल्ली जल बोर्ड ने भी आरोप लगाया है कि बार-बार ध्यान दिलाए जाने के बावजूद हरियाणा ने औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी का बहाव रोकने के लिए समुचित कदम नहीं उठाया है. साथ ही जल बोर्ड ने सीपीसीबी से तुरंत समाधान के लिए उपाय करने का आग्रह भी किया है. (PTI इनपुट के साथ)
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