Home /News /nation /

सुप्रीम कोर्ट ने मजदूरों की हालत पर लिया स्वतः संज्ञान, केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब, पहले खारिज कर दी थी इससे जुड़ी याचिकाएं

सुप्रीम कोर्ट ने मजदूरों की हालत पर लिया स्वतः संज्ञान, केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब, पहले खारिज कर दी थी इससे जुड़ी याचिकाएं

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान स्थिति में जहां देश में लॉकडाउन (Lockdown) चल रहा है, ऐसे में समाज के इस वर्ग को संबंधित सरकारों की मदद की बेहद जरूरत है, खासकर कि भारत सरकार (Government of India) की.

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण लगे लॉकडाउन (Lockdown) के कारण देश के अलग अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी श्रमिकों (Migrant Labourers) को हो रही परेशानियों और पीड़ाओं के संबंध में स्वतः संज्ञान लिया है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी एक ऑर्डर में कहा गया कि न्यूज़पेपर और मीडिया रिपोर्ट्स में लगातार प्रवासी मजदूरों की दुर्भाग्यपूर्ण और व्यथित करने वाली स्थिति दिखाई जा रही है. जिसमें कि मजदूर पैदल और साइकिल द्वारा बेहर लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं. उनकी ओर से यह भी शिकायत की जा रही है कि जहां वह फंसे हैं या जहां से वह विभिन्न माध्यमों से पैदल जा रहे हैं वहां प्रशासन की ओर से खाने-पीने की व्यवस्था नहीं की गई है.

    प्रवासी श्रमिकों को सरकार की मदद की जरूरत
    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान स्थिति में जहां देश में लॉकडाउन चल रहा है, ऐसे में समाज के इस वर्ग को संबंधित सरकारों की मदद की बेहद जरूरत है, खासकर कि भारत सरकार की, राज्य/ केंद्र शासित सरकारों को इस कठिन समय में प्रवासी मजदूरों की ओर मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए.

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अदालत को इस संबंध में समाज के कई वर्गों की ओर से कई पत्र भी मिले हैं जिसमें प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं के बारे में चिंता जाहिर की गई है. शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों की समस्याएं आज भी बनी हुई हैं जहां एक बड़ा वर्ग सड़कों पर, ट्रेनों में, रेलवे स्टेशन पर और राज्यों की सीमाओं पर फंसा हुआ है. इनके लिए केंद्र और राज्य सरकारों को तत्काल उचित वाहनों, खाने और राहत शिविरों की व्यवस्था करनी चाहिए.

    हालांकि भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा इनके लिए कदम उठाए गए हैं लेकिन वह अपर्याप्त हैं और इसमें भी कई खामियां हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें ऐसा लगता है कि हालातों को ठीक करने के लिए प्रभावी और केंद्रित उपाय करने चाहिए.

    सरकारों को दिए मदद करने के निर्देश
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को उनकी मदद करनी चाहिए और उनके ज़ख्म पर मरहम रखना चाहिए. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वह इस बाबत अपना जवाब दाखिल करें. कोर्ट ने कहा कि सरकार बताए कि इन लोगों के लिए क्या कदम उठाया गया है और क्या किया का सकता है. इस मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी.

    पहले सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थीं कई याचिकाएं
    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की कई याचिका दाखिल की गई थीं लेकिन कोर्ट ने उन्हें ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि सरकार अपना काम कर रही है और कोर्ट इसमें कोई दखल नहीं देगा. इस आदेश की कई लोगों ने कड़ी निन्दा की थी. यहां तक कि पूर्व जजों और बड़े वकीलों ने भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को मजदूरों के लिए कुछ करना चाहिए था.

    ये भी पढ़ें-
    महाराष्ट्र नर्सेस एसोसिएशन की CM उद्धव ठाकरे को चिट्ठी- केरल से न बुलाएं नर्स

    फडणवीस पर भड़के पवार, 'जिसके पास काम नहीं, वही सरकार गिराने की सोच सकता है'

    Tags: Government of India, Migrant laborers, Supreme Court

    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर