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SC-ST कोटा में क्रीमी लेयर: 11 साल पुराने फैसले पर संविधान पीठ करेगी विचार

सुप्रीम कोर्ट सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिये अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण के मामले में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने के मुद्दे से संबंधित अपने 11 साल पुराने निर्णय पर बुधवार को विचार करने के लिये तैयार हो गया.

सुप्रीम कोर्ट सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिये अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण के मामले में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने के मुद्दे से संबंधित अपने 11 साल पुराने निर्णय पर बुधवार को विचार करने के लिये तैयार हो गया.

सुप्रीम कोर्ट सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिये अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण के मामले में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने के मुद्दे से संबंधित अपने 11 साल पुराने निर्णय पर बुधवार को विचार करने के लिये तैयार हो गया.

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    सुप्रीम कोर्ट सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के लिये अनुसूचित जाति और जनजातियों के आरक्षण के मामले में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने के मुद्दे से संबंधित अपने 11 साल पुराने निर्णय पर बुधवार को विचार करने के लिये तैयार हो गया.

    शीर्ष अदालत ने कहा कि पांच सदस्यीय संविधान पीठ एक सीमित विषय पर विचार करेगी कि क्या 2006 के एम नागराज बनाम केन्द्र सरकार के मामले में 2006 में सुनाये गये फैसले पर फिर से गौर करने की आवश्यकता है या नहीं.

    प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि वह फैसले के सही होने के मुद्दे पर गौर नहीं करेगी.

    एम नागराज मामले में सुनाये गये फैसले में कहा गया था कि मण्डल आयोग पर फैसले के नाम से चर्चित 1992 के इन्दिरा साहनी प्रकरण और 2005 में ई वी चिन्नैया प्रकरण में सुनाये गये फैसलों की तरह सरकारी नौकरियों में पदोन्नति के मामले में अनुसूचित जाति और जनजातियों पर क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू नहीं की जा सकती है. पहले के दोनों फैसले अन्य पिछड़ा वर्गों की श्रेणियों में क्रीमी लेयर के मुद्दे से संबंधित थे.

    शीर्ष अदालत महाराष्ट्र सरकार के दो प्रस्तावों को निरस्त करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी. कई अन्य राज्यों ने भी इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हैं.

    इससे पहले, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आर भानुमति की दो सदस्यीय पीठ ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति और जनजातियों के मामले में भी क्रीमी लेयर से संबंधित मुद्दों को संविधान पीठ के पास भेज दिया था.

    इस पीठ ने राज्य सरकार को किसी भी पिछड़ा वर्ग के पक्ष में नियुक्तियों और पद के लिये आरक्षण का प्रावधान करने का अधिकार प्रदान करने संबंधी संविधान के अनुच्छेद 16 (4), 16 (4ए) और 16 (4बी) के बारे में स्पष्टीकरण का अनुरोध किया था.

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