नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 18 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ 18 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट

अब तक कुल मिलाकर 13 संगठनों ने इस नए कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर किया है. इन सभी याचिकाओं में कहा गया है कि नागरिकता कानून में संशोधन संविधान के बुनियादी ढांचे और समता के अधिकार सहित मौलिक अधिकारों का हनन करता है.

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  • Last Updated: December 16, 2019, 12:48 PM IST
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नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act 2019)  के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 18 दिसंबर को सुनवाई होगी. इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कुल 13 याचिकाएं दायर की गई हैं. एआईएमआईएम चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi), कांग्रेस सांसद जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा सहित कई याचिकाकर्ताओं ने नागरिकता संशोधन कानून की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं. इन सभी याचिकाओं में कहा गया है कि नागरिकता कानून में संशोधन संविधान के बुनियादी ढांचे और समता के अधिकार सहित मौलिक अधिकारों का हनन करता है.

शीर्ष अदालत में इस कानून की वैधानिकता को चुनौती देते हुए याचिका दायर करने वाले अन्य व्यक्तियों और संगठनों की पूरी लिस्ट
तृणमूल कांग्रेस सांसद- महुआ मोइत्रा
>कांग्रेस सांसद -जयराम रमेश



>एआईएमआईएम चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी
ऑल असम स्टूडेन्ट्स यूनियन


>पीस पार्टी
>गैर सरकारी संगठन ‘रिहाई मंच’
>सिटीजंस अगेन्स्ट हेट
>अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा और कानून के छात्र (सिम्बॉयसिस लॉ स्कूल)
> एहताम हाशमी
>  प्रद्योत देब बर्मन



क्या कहता है संसोधित कानून?
संशोधित नागरिकता कानून के अनुसार 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के सदस्यों को अवैध शरणार्थी नही माना जाएगा और उन्हें भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी. राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार की रात नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को अपनी सहमति दी और इसके साथ ही ये विधेयक कानून बन गया.

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