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सेना में महिला अफसरों के स्‍थायी कमीशन से संबंधित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में होगी आज सुनवाई. (File pic)

सुप्रीम कोर्ट में होगी आज सुनवाई. (File pic)

याचिका में कोर्ट द्वारा स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने के फैसले को लागू नहीं किए जाने की बात कही गई है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 17 फरवरी, 2020 को दिए अपने फैसले में सभी सेवारत शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने को कहा था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 4, 2021, 10:35 AM IST
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नई दिल्‍ली. भारतीय सेना (Indian Army) में महिला अफसरों को स्‍थायी कमीशन (Permanent Commission) देने संबंधी मामले की सुनवाई गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी. यह याचिका एक महिला अफसर ने लगाई है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कहा गया है कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले का पालन न करने के लिए उन लोगों पर कार्रवाई की जाए, जिन्‍होंने फैसले की अवमानना की है. याचिका में कोर्ट द्वारा स्थायी कमीशन देने के फैसले को लागू नहीं किए जाने की बात कही गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी, 2020 को दिए अपने फैसले में सभी सेवारत शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह अपने पुरुष समकक्षों के साथ सेना की गैर-लड़ाकू सहायता इकाइयों में स्थायी आयोग में महिलाओं को भी अनुदान दे. जस्टिस डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने पहले मामले की अंतिम सुनवाई 24 फरवरी के लिए तय की थी.

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24 फरवरी की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वह व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर केंद्र सरकार को पिछले साल दिए अपने उस फैसले में बदलाव नहीं कर सकता, जिसमें सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने का निर्देश दिया गया था.
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा था, ' हम ऐसे विविध आवेदनों के आधार पर हमारे फैसले के साथ जरा भी बदलाव नहीं करेंगे, और वो भी लगभग एक साल बाद. हम व्यक्तिगत मामलों को देखते हुए अपने निर्णय में संशोधन नहीं कर सकते. न्यायिक अनुशासन नाम की भी कोई चीज होती है.'

हालांकि, पीठ ने लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) प्रियंवदा ए मर्दिकार के वकील को उनकी शिकायतें सशस्त्र बल अधिकरण के समक्ष उठाने को कहा था. पूर्व महिला अधिकारी की ओर से पेश वकील एस एस पांडे ने अदालत के समक्ष दलील दी कि एक ही पद पर तैनात दो अधिकारियों में से एक को स्थायी कमीशन प्रदान किया गया जबकि दूसरी अधिकारी को प्रदान नहीं किया गया और बाद में वह सेवानिवृत्त हो गईं.
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