कोरोना से मां-बाप को खो चुके बच्चों को दी गई मदद की जांच करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट जुलाई में करेगा मामले की सुनवाई. (File pic)

सुप्रीम कोर्ट जुलाई में करेगा मामले की सुनवाई. (File pic)

Supreme Court on Coronavirus: जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने कहा कि अभी ऐसे करीब 30,000 बच्चे हैं, लेकिन यह संख्या बढ़ भी सकती है. ऐसे बच्चों की समर्पित निगरानी जरूरी है.

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नई दिल्‍ली. कोरोना काल (Coronavirus) के दौरान अनाथ और बेसहारा हुए बच्चों के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की है. सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित राज्यों को ऐसे बच्चों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए. साथ ही उनको चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सामने पेश किया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा है कि मामले में कल तक आदेश अपलोड किया जाएगा. मामले की सुनवाई जुलाई के तीसरे हफ्ते में की जाएगी. जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने कहा कि अभी ऐसे करीब 30,000 बच्चे हैं, लेकिन यह संख्या बढ़ भी सकती है. ऐसे बच्चों की समर्पित निगरानी जरूरी है. बाल कल्याण समिति को पैनल बनाना चहिए.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कई ऐसे राज्य हैं जिन्होंने पुलिस, जिला मजिस्ट्रेट आदि के साथ कार्यबल तैयार किया है. अभी कोरोना केस की संख्या कम हुई है. राज्य इस पर ध्यान केंद्रित करें. जब वे एनसीपीसीआर वेबसाइट पर डाटा हासिल करते हैं तो भोजन और आश्रय भी प्रदान करना चाहिए. साथ ही केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली और पश्चिम बंगाल के द्वारा ऐसे बच्चों की जानकारी वेबसाइट पर अपलोड नहीं कियए जाने का मुद्दा उठाया गया.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल और दिल्ली द्वारा जानकारी पोर्टल पर अपडेट नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है. साथ ही कहा है कि जब भी आपको जानकारी मिल जाए तो उसे पोर्टल पर अपलोड करें. बच्चों की इन जरूरतों पर ध्यान दें. आदेशों के लिए इंतजार न करें. सुनिश्चित करें कि इन योजनाओं को लागू किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम ऐसे बच्चों की पहचान करने के शुरआती दौर में हैं. सभी राज्यों को बाल स्वराज पोर्टल तक पहुंचने में दिक्कत हो रही है. सीडब्‍ल्‍यूसी की सिफारिशों पर विचार किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि अभी 6 महीने के लिए अग्रिम राहत दी जा रही है. 75 जिलों में से 72 जिलों में प्रक्रिया को पूरा किया जा चुका है. जिला स्तर पर टास्क फोर्स हर 15 दिन पर बैठक करती है. लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है.




तमिलनाडु सरकार ने बताया कि जिन बच्चों ने माता पिता दोनों को खोया है, ऐसे बच्चों को 18 वर्ष का होने पर 5 लाख रुपये और जिन्होंने किसी एक को खोया है ऐसे बच्चों को 3 लाख रुपया दिया जाएगा. ऐसे बच्चों को शिक्षा मुफ्त दी जाएगी. एमिकस क्यूरी ने कहा कि महाराष्ट्र में ऐसे 6 हजार बच्चे हैं जिन्होंने अपने परिजनों को खोया है.

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