सु्प्रीम कोर्ट ने केंद्र के आदेश पर लगाई मुहर, विदेशी पशु-पक्षी रखने वालों के लिए दिया बड़ा फैसला

उच्चतम न्यायालय ने इससे केंद्र सरकार के उस आदेश पर मुहर लगा दी है जिसमें कि विदेशी पशु पक्षियों को रखने वालों या उनके मालिकों को अभियोजन से संरक्षण देने की बात कही गई है.
उच्चतम न्यायालय ने इससे केंद्र सरकार के उस आदेश पर मुहर लगा दी है जिसमें कि विदेशी पशु पक्षियों को रखने वालों या उनके मालिकों को अभियोजन से संरक्षण देने की बात कही गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें कहा गया था कि उन लोगों के खिलाफ मुकदमा नहीं चल सकता जो आम माफी योजना के तहत जून से दिसंबर के बीच विदेशी वन्यजीव प्रजातियों के अधिग्रहण या कब्जे का खुलासा कर दें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 22, 2020, 9:23 PM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रविवार को कहा है कि विदेशी पशु-पक्षी रखने वाले लोग अगर दिसंबर तक उनकी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं तो उनके खिलाफ मुकदमा नहीं चलेगा. उच्चतम न्यायालय ने इससे केंद्र सरकार के उस आदेश पर मुहर लगा दी है जिसमें कि विदेशी पशु पक्षियों को रखने वालों या उनके मालिकों को अभियोजन से संरक्षण देने की बात कही गई है. कोर्ट के मुताबिक ऐसा तभी संभव है जब वे आम माफी योजना के तहत ये खुलासा करते हैं. उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) के फैसले को बरकरार रखा है.

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे (Chief Justice SA Bobade) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें कहा गया था कि उन लोगों के खिलाफ मुकदमा नहीं चल सकता जो आम माफी योजना के तहत जून से दिसंबर के बीच विदेशी वन्यजीव प्रजातियों के अधिग्रहण या कब्जे का खुलासा कर दें. पीठ ने एक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें सरकार की योजना के बावजूद विदेशी वन्यजीव प्रजातियों के अधिग्रहण, कब्जे और व्यापार के लिए जांच और मुकदमा चलाने की मांग की गई थी.





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सरकार की है ये योजना
केंद्र सरकार, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, वन्यजीव प्रभाग के माध्यम से, पहले ही सभी संबंधितों को छह महीने के बचाव का सीमित समय देते हुए स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना को बड़ी आबादी के बीच बढ़ावा देने के लिए शुरू किया है. केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना को सभी विभागों द्वारा व्यापक जनहित में बढ़ावा दिया जाएगा.

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि "छह महीने की इस अवधि में, जो भी विदेशी प्रजातियों के स्टॉक की घोषणा करता है और इस तरह खुद को पंजीकरण और योजना की आगे की आवश्यकताओं के लिए प्रस्तुत करता है, उसकी लाइसेंस अधिग्रहण के स्रोत या स्वेच्छा से विदेशी जीवों के स्टॉक के कब्जे की किसी भी जांच से प्रतिरक्षा होगी."

इस याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया था फैसला
बता दें इलाहाबाद हाईकोर्ट में दिनेश चंद्र नाम के एक शख्स ने जनहित याचिका दायर कर मांग की थी कि आम माफी योजना के तहत जो लोग विदेशी पशु-पक्षी होने का खुलासा करते हैं उनके खिलाफ जांच होनी चाहिए, भले उन लोगों ने आम माफी योजना के तहत ही जानकारी दी हो. दिनेश चंद्र की मांग थी कि ऐसे मामलों की अवैध कब्जे व तस्करी आदि पहलुओं की जांच होनी चाहिए. दिल्ली और राजस्थान हाईकोर्ट में भी ऐसा मामला आया था, जहां याचिकाएं खारिज हो गई थीं. पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की आम माफी योजना पर मुहर लगाई है.

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इसी तरह, राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में यह भी कहा था कि जो भी अपने घरेलू कब्जे में इस तरह की विदेशी जीवित प्रजातियों की स्वैच्छिक घोषणा करके और खुद को भविष्य की नियामक आवश्यकताओं के अधीन करके इस योजना का लाभ उठाने की मांग करेंगे, वह इस स्कीम के तहत प्रतिरक्षा के हकदार होंगे.

इसमें कहा गया है कि घोषणा करने वाले से जब्ती, समन, घरेलू कब्जे में ऐसी घोषित विदेशी प्रजातियों के संबंध में पूछताछ, सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के तहत और न ही किसी अन्य कानून के तहत किसी भी आशंका के आधार पर कार्रवाई नहीं करनी चाहिए.

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया था ये फैसला
इस महीने के एक और हालिया फैसले में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि एक बार योजना के तहत एक स्वैच्छिक प्रकटीकरण छह महीने के भीतर किया जाता है, तो भीतर की प्रजातियों के कब्जे, प्रजनन या परिवहन के लिए किसी व्यक्ति के खिलाफ भारत में किसी सरकारी एजेंसी या विभाग द्वारा कोई जांच या कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती है.

उच्च न्यायालय के आदेशों के साथ और सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक ऐसे फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील को खारिज करने के साथ, इस अवधि के दौरान विदेशी वन्यजीवों के बारे में घोषणाएं करने के खिलाफ आशंकाओं को दूर करते हुए, एक बहुत आवश्यक स्पष्टता आ गई है.



सरकार की एमनेस्टी योजना का उद्देश्य भारत में विदेश के जीवों की एक सूची तैयार करना है. इस सूची में उनके आयात को विनियमित करना और आयातित प्रजातियों का स्टॉक बनाए रखना, स्टॉक के वैधानिक रिकॉर्ड को बनाए रखना, किसी भी तरह से मृत्यु के कारण स्टॉक में बदलाव, भारत में ही उनका ट्रांसफऱ और खरीद आदि शामिल होगा.
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