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SC/ST एक्ट में प्राथमिक जांच के बिना हो सकेगी गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के संशोधनों को रखा बरकरार

News18Hindi
Updated: February 10, 2020, 3:15 PM IST
SC/ST एक्ट में प्राथमिक जांच के बिना हो सकेगी गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के संशोधनों को रखा बरकरार
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का यह फैसला एससी/एसटी संशोधन अधिनियम 2018 को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर आया है. ये याचिकाएं कोर्ट के 2018 के फैसले को निरस्त करने के लिए दाखिल की गई थीं.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का यह फैसला एससी/एसटी संशोधन अधिनियम 2018 को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर आया है. ये याचिकाएं कोर्ट के 2018 के फैसले को निरस्त करने के लिए दाखिल की गई थीं.

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  • Last Updated: February 10, 2020, 3:15 PM IST
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नई दिल्ली. अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन कानून 2018 (SC/ST Act) की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आ चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के संशोधनों को बरकरार रखा है. कोर्ट ने अब साफ किया कि इस कानून के तहत गिरफ्तारी से पहले प्राथमिक जांच की जरूरत नहीं है. इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज करने से पहले किसी अथॉरिटी से इजाजत लेना भी अनिवार्य नहीं होगा. वहीं, अदालत ने यह कहा कि अपने खिलाफ एफआईआर रद्द कराने के लिए आरोपी व्यक्ति कोर्ट में की शरण में जा सकता है.

मोदी सरकार ने साल 2018 में एससी/एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस कानून में कई संशोधन किए थे. जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस विनीत सरण और जस्टिस रवींद्र भट की बेंच ने ये फैसला सुनाया. वहीं, जस्टिस रवींद्र भट ने कहा, 'प्रत्येक नागरिक को सह नागरिकों के साथ समान बर्ताव करना होगा और बंधुत्व की अवधारणा को प्रोत्साहित करना होगा. अगर प्रथम दृष्टया एससी/एसटी अधिनियम के तहत कोई मामला नहीं बनता, तो कोई अदालत प्राथमिकी को रद्द कर सकती है.'

इसके पहले सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च 2018 में अपने फैसले में कहा था कि एससी-एसटी एक्ट के तहत बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं हो सकती है. इस एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस कानून में कई संशोधन किए थे.

क्या है SC/ST एक्ट?
दरअसल, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगों पर होने वाले अत्याचार और उनके साथ होनेवाले भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से अनुसूचित ये एक्ट लाया गया था. जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में इस एक्ट को लागू किया गया. इसके तहत इन लोगों को समाज में एक समान दर्जा दिलाने के लिए कई प्रावधान किए गए और इनकी हरसंभव मदद के लिए जरूरी उपाय किए गए. इन पर होनेवाले अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था की गई, ताकि ये अपनी बात खुलकर रख सके.

हालांकि, 20 मार्च 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान में बदलाव किए थे, जिससे ये एक्ट थोड़ा कमजोर हो गया था. इसके बाद देशभर में इस कानून में बदलाव के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे.

सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के बदलाव करते हुए कहा था कि मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. कोर्ट ने कहा था कि शिकायत मिलने पर तुरंत मुकदमा भी दर्ज नहीं किया जाएगा. शीर्ष न्यायालय ने कहा था कि शिकायत मिलने के बाद डीएसपी स्तर के पुलिस अफसर द्वारा शुरुआती जांच की जाएगी और जांच किसी भी सूरत में 7 दिन से ज्यादा समय तक नहीं होगी. डीएसपी शुरुआती जांच कर नतीजा निकालेंगे कि शिकायत के मुताबिक क्या कोई मामला बनता है या फिर किसी तरीके से झूठे आरोप लगाकर फंसाया जा रहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल की बात को मानते हुए कहा था कि इस मामले में सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच के इस फैसले पर असहमति जताते हुए पुनर्विचार याचिका भी दायर की थी. जिसपर कोर्ट ने फैसला सुना दिया है.


सरकार ने किए थे ये संशोधन
>>एससीएसटी संशोधन विधेयक 2018 के जरिए मूल कानून में धारा 18A जोड़ी गई. इसके जरिए पुराने कानून को बहाल कर दिया गया.
>> नए बदलाव के तहत अब इस तरह के मामले में केस दर्ज होते ही गिरफ्तारी का प्रावधान है. इसके अलावा आरोपी को अग्रिम जमानत भी नहीं मिल सकेगी.
>>आरोपी को हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकेगी. मामले में जांच इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर करेंगे.
>>जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होगा.
>>एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होगी.
>>सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी होगी.

अब सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में केंद्र सरकार के इन संशोधनों को बरकरार रखा है.

(PTI इनपुट के साथ)

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First published: February 10, 2020, 10:51 AM IST
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