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इन विदेशी यात्रियों के विवरण भी बने अयोध्‍या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आधार

News18Hindi
Updated: November 10, 2019, 12:28 PM IST
इन विदेशी यात्रियों के विवरण भी बने अयोध्‍या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आधार
सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का फैसला दिया.

जोसेफ टेफेन्थैलर (Joseph Tiefenthaler), एम मार्टिन (M Martin) और विलियम फिंच (William Finch) ने 17वीं और 18वीं सदी के बीच भारत की यात्रा की थी. इसके बाद उन्‍होंने यात्रा विवरणों में इसका जिक्र किया था. सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने अयोध्‍या फैसले (Ayodhya Verdict) में इन्‍हें भी आधार बनाया.

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  • Last Updated: November 10, 2019, 12:28 PM IST
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नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शनिवार को अयोध्‍या केस (Ayodhya Verdict) में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित जमीन (Disputed Land ) को रामलला विराजमान (Ramlalla Virajmaan) को देने का आदेश दिया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को अयोध्‍या (Ayodhya) में कहीं दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया. अपने इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्राचीन विदेशी यात्रियों के द्वारा अयोध्‍या को लेकर किए गए यात्रा विवरण को भी आधार बनाया. ये थे जोसेफ टेफेन्थैलर (Joseph Tiefenthaler), एम मार्टिन (M Martin) और विलियम फिंच (William Finch).

होती थी पूजा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विदेशी यात्रियों के यात्रा विवरण से हिंदुओं की आस्‍था और विश्‍वास के संबंध में पूरी जानकारी मिलती है. इसमें भगवान राम के जन्मस्थान और हिंदुओं द्वारा जन्‍मस्‍थान पर की जाने वाली पूजा का भी जिक्र है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 18वीं सदी में जोसेफ टेफेन्‍थैलर और एम मार्टिन के यात्रा विवरण विवादित स्‍थल को भगवान राम का जन्‍मस्‍थान मानने के प्रति हिंदुओं की आस्‍था और विश्‍वास को दर्शाते हैं. इन यात्रा विवरणों में विवादित स्‍थल और उसके आसपास सीता रसोई, स्‍वर्ग द्वार और बेदी (झूला) जैसे स्‍थलों की पहचान है, जो वहां भगवान राम के जन्‍म को दर्शाते हैं.


 

पूजा का अस्तित्‍व
पांच जजों की पीठ ने यह भी कहा कि यात्रा विवरणों में विवादित स्थल पर तीर्थयात्रियों द्वारा पूजा पाठ और परिक्रमा करने और धार्मिक उत्सवों के अवसर पर भक्तों की बड़ी भीड़ उमड़ने का भी उल्‍लेख किया गया है. कोर्ट ने कहा कि 1857 में अंग्रेजों द्वारा ईंट-ग्रिल की दीवार के निर्माण से पहले भी विवादित स्थल पर भक्‍तों की ऐतिहासिक उपस्थिति और पूजा का अस्तित्व था.
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हिंदू इन स्‍थलों पर एकत्र होते थे
फिंच (1608-11) और 1743-1785 के बीच भारत का दौरा करने वाले टेफेन्थैलर ने अयोध्या का विवरण दिया. दोनों लेखों में स्पष्ट रूप से हिंदुओं द्वारा भगवान राम की पूजा के संदर्भ हैं. टेफेन्थैलर का यात्रा विवरण विशेष रूप से 'सीता रसोई', 'स्वर्गद्वार' और 'बेदी' को उल्‍लेखित करता है, और उनका यात्रा विवरण धार्मिक उत्सवों का वर्णन करता है, जिसके दौरान हिंदू श्रद्धालु इन स्थलों पर पूजा के लिए एकत्र होते थे.

भगवान राम के झूले का भी जिक्र
टेफेन्थैलर का यात्रा विवरण 18वीं सदी में मस्जिद के सामने बनाई गई ग्रिल-ईंट की दीवार के निर्माण से पहले का है. टेफेन्थैलर के यात्रा विवरण के अनुसार 'जमीन से 5 इंच ऊपर एक चौकोर बॉक्स जिसका बॉर्डर चूने से बना है और इसकी लंबाई 225 इंच के करीब है और अधिकतम चौड़ाई 180 इंच है.' इसे हिंदू बेदी या झूला कहते हैं. टेफेन्थैलर के यात्रा विवरण के अनुसार यह स्‍थान भगवान विष्‍णु के भगवान राम के रूप में जन्‍म लेने के स्‍थान का दर्शाती है.

हालांकि, टेफेन्थैलर ने उल्लेख किया कि जो स्थान पर 'भगवान राम का पैतृक घर' था, हिंदू तीन बार उसकी परिक्रमा करते हैं और फर्श पर लेट जाते हैं. टेफेन्थैलर का यह यात्रा विवरण पूजा के केंद्र बिंदु को संदर्भित करता है, जो भगवान का जन्म स्थान है.

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First published: November 10, 2019, 12:03 PM IST
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