2जी: 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था ये फैसला

जज ने सबूतों के अभाव में एक लाइन में फैसला सुनाते हुए आरोपियों को निर्दोष बताया.

News18Hindi
Updated: December 21, 2017, 3:50 PM IST
2जी: 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था ये फैसला
जज ने सबूतों के अभाव में एक लाइन में फैसला सुनाते हुए आरोपियों को निर्दोष बताया.
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Updated: December 21, 2017, 3:50 PM IST
2जी स्पैक्ट्रम केस में दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने ए. राजा, कनिमोझी सहित सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया. जज ने सबूतों के अभाव में एक लाइन में फैसला सुनाते हुए आरोपियों को निर्दोष बताया. कांग्रेस की यूपीए सरकार के समय के हुए इस केस से तत्कालीन सरकार और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की किरकिरी हुई थी. पूर्व CAG प्रमुख विनोद राय ने इसका खुलासा किया था. इसके बाद से बीजेपी कांग्रेस पर आरोप लगा रही थी. आइए जानते हैं कि 2 फरवरी 2012 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जी एस सिंघवी और ए के गांगुली की बेंच ने इस पर क्या फैसला सुनाया था:-

> स्पेक्ट्रम एक दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन है. इसे सेना ने देश के लिए छोड़ा. लेकिन पैसे की ताकत रखने वाले लोगों ने उसे हथिया लिया.

> जिस तरह से लेटर ऑफ इंटेंट जारी किए गए, वो पूरी तरह से शक के घेरे में है. साफ लगता है कि पूरी प्रक्रिया योजना के साथ इस तरह से चलाई गई कि 2004 से 2006 के बीच आवेदन करने वाले पीछे रह जाएं. 2007 में आवेदन करने वालों को लाइसेंस मिल जाए. लाइसेंस पाने वाले भी ये सब जानते थे.

> संचार मंत्री ने कानून मंत्री और प्रधानमंत्री के सुझावों को दरकिनार कर दिया.

इस तरह के कई और पहलुओं की चर्चा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि:-

> 10 जनवरी 2008 और उसके बाद बांटे गए सभी लाइसेंस रद्द किए जाते हैं.

> ये आदेश 4 महीने बाद लागू होगा.
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> दो महीने मे TRAI 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की प्रक्रिया तय करे.

> TRAI की सिफारिशों पर एक महीने के भीतर केंद्र सरकार विचार कर फैसला ले.

> 2, 3 और 9 ने टेलिकॉम विभाग के पूरी तरह से मनमाने और असंवैधानिक फैसलों का फायदा उठाया. बाद में हजारों करोड़ रुपये के फायदे पर अपने शेयर बेचे. उन्हें 5-5 करोड़ रुपये का दंड देना होगा. 4, 6, 7 और 10 को 50-50 लाख रुपए का जुर्माना देना होगा.

> जमा रकम का 50 फीसदी सुप्रीम कोर्ट की लीगल ऐड सेवा को दिया जाए और 50 फीसदी प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा हो.

> हम ये साफ करना चाहते हैं कि सीबीआई और निचली अदालत इस फैसले में हमारी किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना अपना काम करें.
First published: December 21, 2017, 1:29 PM IST
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