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क्या कमजोर दृष्टि वाले डॉक्टर बन सकते हैं, इस मामले पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट

भाषा
Updated: June 15, 2018, 9:38 PM IST
क्या कमजोर दृष्टि वाले डॉक्टर बन सकते हैं, इस मामले पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
(Image: Network18 Creatives)

लो विजन में आंखों की रोशनी को दुरूस्त नहीं किया जा सकता

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सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार इस विषय पर विचार के लिये सहमत हो गया कि क्या कमजोर दृष्टि (लो विजन) की वाले व्यक्ति को एमबीबीएस की पढ़ाई करने और डॉक्टर बनने की अनुमति दी जा सकती है. लो विजन में आंखों की रोशनी को दुरूस्त नहीं किया जा सकता.

जस्टिस उदय यू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाश कालीन पीठ के समक्ष यह पेचीदा सवाल आया. पीठ ने अचरज में कहा कि क्या इस तरह की कमजोर रोशनी वाले व्यक्ति को डॉक्टर बनने और मरीजों का उपचार करने की अनुमति देना व्यावहारिक है.

पीठ ने नीट -2018 की परीक्षा पास करने वाले एक छात्र की याचिका पर केन्द्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किये. इस याचिका में अनुरोध किया गया है कि उसे कानून के मुताबिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया जाये ताकि वह एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सके.

पीठ ने कहा, ‘यदि आप वकालत या शिक्षण जैसे किसी अन्य पेशे के बारे में बात करें तो समझ में आता है कि एक दृष्टिहीन व्यक्ति सफलतापूर्वक इस क्षेत्र में काम कर सकता है. लेकिन जहां तक एमबीबीएस का संबंध है तो हमें देखना होगा कि यह कितना व्यावहारिक और संभव है.’



जस्टिस ललित ने एक नेत्रहीन इंटर्न के साथ अपने अनुभव याद करते हुये कहा कि उसे दस्तावेजों को पढ़ने में दिक्कत होती थी और वह डिजिटल दस्तावेजों को पढ़ने और उन्हें समझने के लिये ब्रेल रूप में परिवर्तित करता था.

जस्टिस ललित ने कहा कि मेरे साथ सफलतापूर्वक अपनी इंटर्नशिप पूरी करने के बाद वह अब रोड्स स्कॉलर बन गया है और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ रहा है.

नाबालिग छात्र पुरस्वामी आशुतोष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगडे और वकील गोविन्द जी ने कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों से संबंधित 2016 के कानून में पहले से ही इस श्रेणी के लिये पांच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है.

उन्होंने कहा कि केन्द्र और गुजरात सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए. इस कानून के अंतर्गत आरक्षण के प्रावधानों को लागू किया जाये.

इस पर पीठ ने कहा, ‘शिक्षण और वकालत के पेशे के संदर्भ में कोई समस्या नहीं है लेकिन जब मेडिकल शिक्षा का सवाल आता है तो क्या लो विजन वाले व्यक्ति को अनुमति दी जा सकती है? हमे इस पर विचार करना होगा.’

पीठ ने छात्र को तीन दिन के भीतर अहमदाबाद के बी. जे. मेडिकल कॉलेज की समिति के समक्ष इस आदेश की प्रति के साथ पेश होने का निर्देश दिया.

पीठ ने इस मामले की सुनवाई तीन जुलाई के लिये निर्धारित करते हुये कहा कि याचिका की मेडिकल जांच होगी और उसके लो विजन संबंधी दावे के बारे में उचित चिकित्सा प्रमाण पत्र चार दिन के भीतर शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में भेजा जाये.

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First published: June 15, 2018, 9:38 PM IST
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