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अर्नब गोस्‍वामी को क्‍यों दी गई जमानत? आज वजहों के बारे में बताएगा सुप्रीम कोर्ट

न्यायालय पत्रकार अर्नब गोस्वामी को दी गयी अंतरिम जमानत की वजहों के बारे में बताएगा (फाइल फोटो)
न्यायालय पत्रकार अर्नब गोस्वामी को दी गयी अंतरिम जमानत की वजहों के बारे में बताएगा (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा था कि 'अगर निजी स्वतंत्रता का हनन हुआ तो यह न्याय पर आघात होगा.' न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ शुक्रवार को अपने फैसले के कारणों के बारे में बताएगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 12:10 AM IST
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नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) आत्महत्या (Suicide) के लिए कथित तौर पर उकसाने के 2018 के मामले में पत्रकार अर्नब गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत प्रदान करने के संबंध में शुक्रवार को विस्तृत कारण बताएगा. शीर्ष अदालत ने गोस्वामी को 11 नवंबर को जमानत दे दी थी. न्यायालय ने कहा था कि 'अगर निजी स्वतंत्रता का हनन हुआ तो यह न्याय पर आघात होगा.' न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ शुक्रवार को अपने फैसले के कारणों के बारे में बताएगी.

शीर्ष अदालत ने मामले में दो अन्य आरोपियों-नीतीश सारदा और फिरोज मोहम्मद शेख को 50-50,000 रुपये के निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत दे दी थी और उसने किसी भी प्रकार से सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने और जांच में सहयोग के लिए कहा था. रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक गोस्वामी ने अंतरिम जमानत देने से इनकार करने के उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी.

विशेषाधिकार हनन का मामला: अर्नब का न्यायालय से महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस देने का अनुरोध
पत्रकार अर्नब गोस्वामी ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष को नोटिस जारी कर उनसे सदन के अधिकारी के बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया जाये. इस अधिकारी ने न्यायालय को दिये अपने जवाब में कहा है कि कथित विशेषाधिकार हनन के मामले में उसने अध्यक्ष के निर्देश पर अर्नब गोस्वामी को पत्र भेजा था. प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी मासुब्रमणियन की पीठ ने शुरू में कहा कि संभवत: अध्यक्ष को नोटिस देने की आवश्यकता होगी ताकि सदन के अधिकारी के कथन के दावे के बारे में उनका पक्ष जाना जा सके, लेकिन बाद में अर्नब की याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिये स्थगित कर दी. पीठ ने कहा कि उसने विधानसभा के सहायक सचिव के जवाब का अभी अवलोकन नहीं किया है.
शीर्ष अदालत ने छह नवंबर को महाराष्ट्र विधानसभा के सहायक सचिव विलास आठवले को कारण बताओ नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर पूछा है कि पत्रकार अर्णब गोस्वामी को वह पत्र लिखने के कारण क्यों नहीं उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाये, जिससे लगता है कि उन्हें कथित विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव के मामले में शीर्ष अदालत जाने की वजह से ‘धमकाया’ गया है. अर्नब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने पीठ को सूचित किया कि अवमानना के लिये कारण बताओ नोटिस के जवाब में विधानसभा के अधिकारी ने कहा है कि उसने अध्यक्ष के निर्देश पर यह पत्र लिखा था.


साल्वे ने कहा, ‘‘उनका (आठवले) कहना है कि उन्होंने अध्यक्ष के निर्देश पर काम किया था. कृपया विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी कीजिये.’’

आठवले की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने साल्वे के कथन का विरोध किया और कहा कि अवमानना का कोई मामला नहीं बनता है और चूंकि अधिकारी ने कहा है कि उसने अध्यक्ष के निर्देश पर काम किया, इसका मतलब यह नहीं कि इस चरण में अध्यक्ष को बुलाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अध्यक्ष को नोटिस जारी करने से पहले यह देखना होगा कि क्या अवमानना का कोई मामला बनता है या नहीं. पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘इस बात की आशंका है कि अध्यक्ष बाद में कह सकते हैं कि उन्हें नहीं सुना गया.’’ साथ ही पीठ ने इस मामले में न्याय-मित्र की भूमिका निभा रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अरविन्द दातार से इस बारे में उनकी राय जाननी चाही.
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