प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में कल सुप्रीम कोर्ट करेगा फैसला

प्रशांत भूषण मामले में कल सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा. (फाइल फोटो)

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा (Arun Mishra), न्यायमूर्ति बी.आर. गवई (B.R. Gavai) और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी (Krishna Murari) की पीठ इस मामले में 14 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी.

  • Share this:
    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) न्यायपालिका के प्रति कथित रूप से दो अपमानजनक ट्वीट करने के मामले में वकील प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) के खिलाफ स्वत: शुरू की गई अवमानना कार्यवाही (Contempt Proceedings) में शुक्रवार को फैसला सुनाएगा. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ इस मामले में 14 अगस्त को अपना फैसला सुनाएगी. न्यायालय ने पांच अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी करते हुए कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा.

    प्रशांत भूषण ने किया है ट्वीट का बचाव
    इससे पहले, अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने उन दो ट्वीट का बचाव किया था, जिसमें कथित तौर पर अदालत की अवमानना की गई है. उन्होंने कहा था कि वे ट्वीट न्यायाधीशों के खिलाफ उनके व्यक्तिगत स्तर पर आचरण को लेकर थे और वे न्याय प्रशासन में बाधा उत्पन्न नहीं करते. न्यायालय ने इस मामले में प्रशांत भूषण को 22 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था.

    पीठ ने सुनवाई पूरी करते हुये 22 जुलाई के आदेश को वापस लेने के लिए अलग से दायर आवेदन खारिज कर दिया था. इसी आदेश के तहत न्यायपालिका की कथित रूप से अवमानना करने वाले दो ट्वीट पर अवमानना कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया गया था.

    दुष्यंत दवे ने रखा प्रशांत भूषण का पक्ष
    पीठ सुनवाई के दौरान भूषण का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे के इस तर्क से सहमत नहीं थी कि अलग आवेदन में उस तरीके पर आपत्ति जताई है, जिसमें अवमानना प्रक्रिया अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल की राय लिए बिना शुरू की गई और उसे दूसरी पीठ के पास भेजा जाए.

    भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के सेकेट्री जनरल द्वारा कथित तौर पर असंवैधानिक और गैर कानूनी तरीके से उनके खिलाफ दायर त्रुटिपूर्ण अवमानना याचिका स्वीकार करने पर भी व्यवस्था देने का अनुरोध किया था जिसमें शुरुआत में याचिका प्रशासनिक पक्ष के पास रखी गई और बाद में न्यायिक पक्ष के पास. न्यायालय ने आदेश में कहा, ‘मामले में पेश वरिष्ठ अधिवक्ता (दवे) को सुना. हमें इस रिट याचिका पर सुनवाई का आधार नहीं दिखता और इसलिए इसे खारिज किया जाता है.’

    दवे ने इसके बाद भूषण के खिलाफ दायर अवमानना मामले में बहस की और कहा, ‘दो ट्वीट संस्था के खिलाफ नहीं थे. वे न्यायाधीशों के खिलाफ उनकी व्यक्तिगत क्षमता के अंतर्गत निजी आचरण को लेकर थे. वे दुर्भावनापूर्ण नहीं हैं और न्याय के प्रशासन में बाधा नहीं डालते हैं.' उन्होंने कहा था, ‘भूषण ने न्यायशास्त्र के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है और कम से कम 50 निर्णयों का श्रेय उन्हें जाता है.’ दवे ने कहा कि अदालत ने 2जी, कोयला खदान आवंटन घोटाले और खनन मामले में उनके योगदान की सराहना की है.

    उन्होंने कहा, ‘संभवत: आपने भी उनके 30 साल के कार्यों के लिए उन्हें पद्म विभूषण दिया होता.’ दवे ने यह भी कहा था कि कि यह मामला नहीं है जिसमें उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए.

    आपातकाल का दिया गया उदाहरण
    आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों के स्थगित करने के एडीएम जबलपुर के मामले का संदर्भ देते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि न्यायाधीशों के खिलाफ अत्यंत असहनीय टिप्पणी किए जाने के बावजूद अवमानना की कार्यवाही नहीं की गई. अपने 142 पन्नों के जवाब में भूषण ने अपने दो ट्वीट पर कायम रहते हुए कहा कि विचारों की अभिव्यक्ति, ‘हालांकि मुखर, असहमत या कुछ लोगों के प्रति असंगत’ होने की वजह से अदालत की अवमानना नहीं हो सकती.

    वहीं, शीर्ष अदालत ने भूषण के ट्वीट का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह आम लोगों की नजर में सामान्य तौर पर उच्चतम न्यायालय की संस्था और भारत के प्रधान न्यायाधीश ‘की शुचिता और अधिकार’ को कमतर करने वाला है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.